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जम्मू-कश्मीर में कोरोना महामारी घोषित, भूलकर भी न करें ये गलती वरना जाना होगा जेल

Tue, 17 Mar 2020 11:38 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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कोरोना वायरस पर रोकथाम लगाने के लिए बस में स्प्रे करता स्वास्थ्य कर्मचारी - फोटो : अमर उजाला
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जम्मू-कश्मीर में कोरोना को महामारी घोषित कर दिया गया है। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से सोमवार देर रात आदेश जारी किया गया। जानिए इस संक्रामक बीमारी के महामारी घोषित होते ही क्या-क्या बदल जाएगा...

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क्या होती है महामारी
महामारी शब्द उन संक्रमणकारी बीमारियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो एक ही समय में दुनिया के अलग-अलग देशों के लोगों में फैल रही हो। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, जब वायरस बिल्कुल नया हो, वह संपर्क के द्वारा आसपास के लोगों को संक्रमित कर रहा हो और उसका कोई इलाज न हो या उससे हो रही मौतों की संख्या तेजी से आगे बढ़ रही हो तो उसे महामारी घोषित किया जा सकता है।

अंग्रेजी के शब्द एपिडेमिक से पैनडेमिक दोनों का अर्थ महामारी ही होता है। लेकिन, दोनों में एक बड़ा अंतर भी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने शुरूआत में कोरोना वायरस को एपिडेमिक घोषित किया था। इसका हिंदी में अर्थ एक क्षेत्र विशेष तक ही सीमित रहने वाली बीमारी होता है। लेकिन, बाद में डब्लूएचओ ने इसे पैनडेमिक घोषित कर दिया। इसका मतलब एक ही बीमारी से दुनिया के कई देश संक्रमित हो जाएं।

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भारत का महामारी रोग कानून क्या है

सार्वजनिक सूचना (टीवी, अखबार, फोन, पर्चे आदि) के जरिये महामारी के प्रसार की रोकथाम के उपाय करना।
सरकार किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह जो महामारी से ग्रस्त है उसे किसी अस्पताल या अस्थायी आवास में रख सकती है।
सरकारी आदेश नहीं मानना अपराध होगा और आईपीसी की धारा 188 के तहत सजा भी मिल सकती है। इसके अलावा जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
महामारी एक्ट में सरकारी अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा प्राप्त है। अगर कोई अनहोनी होती है तो सरकारी अधिकारी की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।

कोरोना वायरस के महामारी घोषित होने से क्या प्रभाव होगा

कोरोना वायरस के महामारी घोषित होने से सरकारों का ध्यान खींचने में मदद मिलेगी। इससे  वैश्विक स्तर पर निष्क्रियता को कम किया जा सकेगा और लोगों को सतर्क करने में मदद मिलेगी।

फंडिंग में होगी आसानी
कोरोना वायरस के महामारी घोषित होने से अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से मिलने वाली फंडिंग में आसानी होगी। बता दें कि दुनियाभर में कई ऐसे संस्थान हैं जो कोरोना से लड़ने के लिए धन मुहैया करा रहे हैं।
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सरकारी आदेश की अवमानना अपराध की श्रेणी में

महामारी घोषित होते ही सभी सार्वजनिक स्थलों को बंद करने की कवायद शुरू हो जाती है। इसमें सरकार संक्रमित मरीजों को अलग रखकर इलाज कराती है और जब यह बीमारी तेजी से फैलने लगती है तो सभी सार्वजनिक स्थलों को तत्काल बंद कर दिया जाता है।

यही नहीं महामारी के संबंध में सरकारी आदेश न मानने को अपराध के अंतर्गत रखा जाता है। इसमें व्यक्ति को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 188 के तहत गिरफ्तारी की जा सकती है।
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