जम्मू। कोविड संक्रमण के बीच लापरवाही भी जानलेवा साबित हो रही है। लक्षण दिखने पर लोग अपनी मर्जी से दवा खा रहे हैं और फिर गंभीर होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। जीएमसी पहुंच रहे संक्रमित मरीजों में 90 फीसदी घरों से ही गंभीर हालत में आ रहे हैं। इसका मुख्य कारण डॉक्टर से उचित सलाह न लेना है। कई मरीज अस्पताल पहुंचकर चौबीस घंटे के भीतर ही दम तोड़ रहे हैं। इनमें उम्रदराज और मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय आदि बीमारियों से ग्रस्त लोगों के लिए ज्यादा खतरा बना हुआ है। डॉक्टरों के अनुसार ऐसे गंभीर मरीजों में संक्रमण का प्रसार बढ़ जाता है, जिससे उन्हें बचाना मुश्किल हो रहा है।
पिछले 18 दिन में जिला जम्मू में 76 लोगों की कोविड संक्रमण के कारण मौत हो चुकी है, जबकि 31 अगस्त तक यह आंकड़ा सिर्फ 44 था। जिले में संक्रमित मामलों का आंकड़ा भी दस हजार के करीब पहुंच गया है, जिसमें 6 हजार से अधिक मामले सक्रिय हैं। जीएमसी प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती गंभीर मरीजों को लेकर बनी हुई है। इसमें 50-80 वर्ष के मरीज अधिक गंभीर हालत में पहुंच रहे हैं। इन सभी में देखा जा रहा है कि यह संक्रमित होने पर 5-10 दिन घर पर ही आइसोलेट रहे, लेकिन इन्होंने डॉक्टर से सलाह करके उचित इलाज नहीं लिया है। इन मरीजों में कई गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हैं। वहीं, जीएमसी में ऑक्सीजन के पर्याप्त प्रेशर की दिक्कतों को लेकर मरीजों के साथ तीमारदारों में दहशत बनी हुई है।
लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल पहुंचे
जीएमसी के प्रिंसिपल डॉ. नसीब चंद डिगरा का कहना है कि अस्पताल प्रशासन की ओर से मरीजों को सभी उचित चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही हैं। लेकिन उनके पास पहुंच रहे अधिकांश संक्रमित मरीज गंभीर हालत में आ रहे हैं। कोविड लक्षण दिखने पर ऐसे मरीजों को तुरंत डाक्टर की उचित सलाह लेनी चाहिए। खासतौर पर पहले से विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त लोगों को अगर सांस लेने या अन्य कोई चिकित्सा दिक्कत होती है तो उन्हें तुरंत इलाज लेना चाहिए।