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पाक आतंकियों की सांठगांठ से फिर हो रही है कश्मीर में हिंसा भड़काने की साजिश

Mon, 28 Nov 2016 12:13 PM IST
राघवेद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/जम्मू
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कश्मीर में 4 महीनें से ज्यादा दिन हुई हिंसा - फोटो : PTI
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कश्मीर में तेजी से सामान्य हो रही स्थिति आतंकी संगठनों और अलगाववादियों को रास नहीं आ रही है। घाटी में फिर से बंद और हड़ताल के आयोजनों की आड़ में हिंसा भड़काने की कोशिशें तेज हुईं हैं।
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सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मिले हैं कि अलगाववादी मस्जिद समितियों को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ प्रमुख अलगाववादी नेता पाकिस्तान और पीओके में सक्रिय आतंकी संगठनों से संपर्क हैं। उन्हें पाक से वित्तीय सहायता भी मिलती है। एजेंसियों ने गृह मंत्रालय को इस आशय की रिपोर्ट भेजी है।

रिपोर्ट के मुताबिक विघटनकारी तत्वों और अलगाववादियों में सांठगांठ है। गृह विभाग के सूत्रों के कहना है कि अलगाववादियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। 
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रोक दी गई अलगाववादियों की बैठकें

अलगाववादी नेता ग‌िलानी - फोटो : Amar Ujala
कश्मीर में हिंसा और उपद्रव के चार महीनों में अलगाववादियों ने हड़ताल कलेंडरों को तामील कराने के लिए मस्जिद समितियों का सहारा लिया था। धार्मिक प्रवचनों में हड़ताल और बंद के समर्थन के लिए अपीलें की गईं। पेलेट गन से घायल लोगों की संख्या बढ़ा चढ़ा कर पेश की जाती रही।

सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे गए उपद्रवियों और आतंकियों की संख्या को भी गलत तरीके से बताया जाता रहा। इस क्रम में बनाई गई कुछ फर्जी सूचियां भी सुरक्षा एजेंसियों के हाथ लगी हैं।

रात में मस्जिदों से तराना बजाकर उपद्रव के लिए भीड़ जुटाने के प्रयास भी हुए। सुरक्षा एजेंसियां इस बार सतर्कता बरत रही हैं। एहतियातन अलगाववादी नेताओं की बैठकें अब रोक दी गईं हैं। 
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अलगाववादियों को दिख रहा है वजूद का खतरा

यासीन मलिक - फोटो : Amar Ujala
इससे पहले अलगाववादी नेताओं सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक और यासीन मलिक के बीच दो बार बैठकों की इजाजत दी गई थी। अलगाववादी नेताओं ने सिविल सोसाइटी, व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों से भी बैठकें कीं।

अब हड़ताल और बंद के बेअसर होने के बाद से अलगाववादी अब सप्ताह में दो दिन हड़ताल में पूरी छूट देने को विवश हुए हैं लेकिन अपीलें बेअसर होने से उन्हें वजूद का खतरा भी दिख रहा है।

नतीजतन हड़ताल और बंद के लिए फिर से धार्मिक प्रवचनों का सहारा लिया जा सकता है। शासन ने अलगाववादियों की धार्मिक प्रवचनों में शिरकत भी रोक दी है। 
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