कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस से समर्थर वापस लेने की मांग खारिज कर दी है। कांग्रेस आलाकमान से साफ कर दिया है कि वर्तमान सरकार को कांग्रेस की तरफ से समर्थन जारी रहेगा और सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी।
नेकां की तरफ से समर्थन वापस लेने के बाद कांग्रेस में वर्तमान सरकार से समर्थन वापसी की मांग उठने लगी थी। कांग्रेसियों की मांग के उलट कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने जम्मू कश्मीर के नेताओं को बता दिया है कि सरकार से समर्थन वापसी नहीं होगी।
वहीं वर्तमान नेंका सरकार का कार्यकाल पूरा करने के लिए समर्थन जारी रखने के पक्ष में है।
नवंबर तक रियासत में होंगे विधानसभा चुनाव
राज्य की वर्तमान नेकां सरकार का कार्यकाल दिसम्बर में पूरा हो रहा है और 5 जनवरी से पहले नई सरकार का गठन किया जाना है। नई सरकार के गठन के लिए चुनाव आयोग ने अक्टूबर के अंत या नवम्बर महीने में चुनाव कराने की तैयारी शुरू कर दी है।
विधानसभा चुनाव में रास्ते अलग होने के बाद कांग्रेस के एआईसीसी सदस्य अबदुल गनी वकील समेत कई नेताओं ने सरकार से समर्थन वापसी के लिए मुहिम शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य से यह वक्त का तकाजा बन गया है कि कांग्रेस गठबंधन सरकार से अलग हो जाए लेकिन कांग्रेसी मंत्रियों ने इसका विरोध किया।
...ताकि चुनाव में मुद्दों को भुनाया जा सके
कांग्रेसी मंत्री सरकार में बने रहकर नई प्रशासनिक इकाइयों के गठन और रिफ्यूजियों के लिए वन टाइम सेटलमेंट पैकेज जैसे कुछ निर्णयों को लागू करना चाहते हैं ताकि चुनाव में उसे भुनाया जा सके। इस मुद्दे पर कांग्रेसी दिग्गजों में मतभेद के बाद अब आलाकमान ने सरकार में बने रहने का फैसला लेकर विवाद का पटाक्षेप कर दिया है।
लोकसभा चुनाव में गठबंधन के दोनों दलों कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस का सूपड़ा साफ हो गया था। दोनों दलों के खाते तक नहीं खुल सके। पीडीपी और भाजपा के पक्ष में तीन-तीन सीटें आईं।
जमीनी कार्यकर्ताओं ने नामंजूर किया फैसला
नेकां और कांग्रेस आलाकमान ने लोकसभा चुनाव में गठबंधन का फैसला लिया था लेकिन जमीनी स्तर पर दोनों दलों के कार्यकर्ताओं ने इसे स्वीकार नहीं किया।
कांग्रेस के मंत्री ताज मोहिद्दीन पर नेकां नेताओं ने मदद नहीं करने का आरोप सार्वजनिक तौर पर लगाया।
लद्दाख में नेशनल कांफ्रेंस ने खुलकर कांग्रेस उम्मीदवार का विरोध कर निर्दलीय को समर्थन दिया। इस तरह गठबंधन टूटने का पृष्ठभूमि तैयार हुई।
यूपीए की विफलता से मुक्ति चाहिए
हार के बाद नेकां और कांग्रेस की अलग-अलग मंथन बैठकों में प्रमुख पदाधिकारियों ने गठबंधन को हार का कारण बताया। नतीजतन मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाकात कर अलग चुनाव लड़ने के फैसले से अवगत करा दिया।
बाद में कांग्रेस महासचिव अम्बिका सोनी, गुलाम नबी आजाद और सैफुद्दीन सोज ने जम्मू की मंथन बैठक के बाद ऐसा ही ऐलान किया। नेकां को लगता है कि कांग्रेस से अलग होने पर उसे यूपीए की विफलता के दाग से मुक्ति मिल जाएगी।
उधर कांग्रेस नेकां से अलग होकर जम्मू संभाग में भाजपा की चुनौती से निपटना चाहती है।