फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जम्मू-कश्मीरः वकीलों की हड़ताल को मिला कांग्रेस का समर्थन, 40 हजार पेड़ों की कटाई का मामला भी गरमाया

Tue, 05 Nov 2019 04:55 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
विज्ञापन
वकीलों की हड़ताल - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

रजिस्ट्री को लेकर वकीलों की हड़ताल जारी है। सोमवार को भी वकीलों ने जिला कोर्ट और हाईकोर्ट में काम नहीं किया। रजिस्ट्री के राजस्व विभाग में शिफ्ट होने की वजह से अदालत परिसर में चहल-पहल भी कम रही। वकील रजिस्ट्री को लेकर अपने रवैये में नरम पड़ने के मूड में नहीं हैं। ऐसे में यह मामला अभी और तूल पकड़ेगा।

विज्ञापन


हाईकोर्ट को जानीपुर से बठिंडी में शिफ्ट करने को लेकर भी वकील आक्रोशित हैं। दरअसल, नया हाईकोर्ट कांप्लेक्स बनाने के लिए बठिंडी के जंगल में 40 हजार से अधिक पेड़ कटने हैं। वकील नहीं चाहते कि न्याय का कार्यालय पेड़ों की कटाई करके बने।

जानकारी के अनुसार जिला कोर्ट में हर रोज औसतन 200 से 300 रजिस्ट्री होती थीं। इससे वकीलों को अच्छी खासी आय होती थी, लेकिन अब रजिस्ट्री बंद होने से वकीलों की आय पर असर पड़ रहा है। जो वकीलों को गवारा नहीं है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के उप प्रधान रोहित भगत का कहना है कि अभी तक हड़ताल तो जारी ही है। आगे की रणनीति तय करेंगे। अभी किसी से कोई बात नहीं हुई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

कांग्रेस ने किया वकीलों की हड़ताल का समर्थन

वकीलों की हड़ताल और कोर्ट से रजिस्ट्री के शिफ्ट होने का असर कोर्ट परिसर में होने वाली चहल-पहल पर भी पड़ा है। हर सोमवार को कोर्ट में काफी चहल-पहल रहती थी, लेकिन केंद्र शासित प्रदेश के पहले सोमवार को कोर्ट में चहल-पहल काफी रही। वकीलों की हड़ताल भी इसकी एक वजह रही।

कांग्रेस नेता रमण भल्ला ने वकीलों की हड़ताल का समर्थन किया है। उन्होंने राज्य प्रशासन से उनकी मांगों पर गौर करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वकील समाज का एक बड़ा अंग है, लिहाजा प्रशासन को उनकी मांगों को गंभीरता से लेना चाहिए। इसके लिए बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए।

कहा कि लोगों और वकीलों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रजिस्ट्री प्रक्रिया को राजस्व विभाग में शिफ्ट करने के फैसले पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। वकीलों की हड़ताल से लोगों को न्यायपालिका में अपने कामकाज कराने में परेशानी झेलनी पड़ रही है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें