कांग्रेस नेता प्रणव शगोत्रा किए गए नजरबंद
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आखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य एवं राज्य के पूर्व युवा कांग्रेस अध्यक्ष प्रणव शगोत्रा को प्रेस कांफ्रेंस करने से रोकते हुए पुलिस ने नजरबंद कर दिया। शगोत्रा की तरफ से अपने छन्नी हिम्मत स्थित निवास पर दोपहर बाद पत्रकार वार्ता बुलाई गई थी। जैसे ही पत्रकार उनके घर पर आने लगे पुलिस वहां पहुंच गई और उन्होंने पत्रकारों व छायाकारों को घर से बाहर चले जाने की बात करते हुए प्रणव शगोत्रा को नजरबंद कर दिया।
शगोत्रा ने कहा कि जम्मू कश्मीर को राज्य से कम कर केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया जा रहा है। केंद्र शासित प्रदेश यहां पर वहां के लोग राज्य के दर्जे के लिए संघर्ष करते रहते हैं और यहां पर राज्य को कम कर केंद्र शासित प्रदेश बनाया जा रहा है। मोदी सरकार पुलिस के माध्यम से लोकतांत्रिक अधिकारों तक को कुचलने का काम कर रही है। देर शाम को शगोत्रा ने फोन पर बताया कि उन्होंने कहा पुलिस के दो कांस्टेबल उनके घर पर बैठा दिए गए हैं।
वहीं डोगरा सदर सभा (डीएसएस) के प्रेसीडेंट और ऑल जम्मू सिविल सोसाइटी फोरम (ऐजेसीएसएफ) के कनीवर ठाकुर गुलचैन सिंह चाढ़क को उनके घर ग्रेटर कैलाश में नजरबंद कर दिया गया। वह उस समय डोगरा भवन में डीएसएस की बैठक की अध्यक्षता करने जा रहे थे। उनको नजरबंद करने को लेकर डोगरा भवन में मौजूद सदस्यों ने निंदा की है। उन्होंने बताया कि ये बैठक सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 और 35 ए को हटाए जाने की सराहना के लिए रखी थी। सदस्यों का कहना है कि ये कोई राजनीतिक साजिश है।
दूसरी ओर डोगरा सदर सभा का कहना है कि डोगरों की पहचान को बचाने के लिए यहां हिमाचल प्रदेश और उत्तर पूर्वी राज्यों की तरह अनुच्छेद 371 व 372 लागू होना चाहिए। यहां पर शैक्षणिक सीटों, नौकरियों में स्थानीय लोगों को देखते हुए 80:20 की रेशियो होनी चाहिए। उनका कहना है जम्मू और कश्मीर दोनों को अलग-अलग सचिवालय और काउंसिल बनाई जाए। यहां पर उद्योग जगत, टूरिज्म, शिक्षा आदि क्षेत्रों में विकास होना चाहिए सहित अन्य मांगे रखी हैं।
सीपीआई(एम) ने जल्द से जल्द नजरबंद किए नेताओं को रिहा करने की मांग की है। क्षेत्रीय सचिव शाम प्रसाद केसर ने वरिष्ठ नेता एमवाई तारीगामी का स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ा है। चेकअप करवाने दिल्ली भी नहीं पहुंच पा रहे हैं। जल्द से जल्द उन्हें रिहा किया जाए। जल्द से जल्द इंटरनेट सेवाएं बहाल की जाए।