घाटी में अलगाववादियों का बंद दम तोड़ने लगा है। पिछले चार महीने से अधिक समय से बंद झेल रही अवाम ने बेरुखी दिखाना शुरू कर दिया है। इस वजह से कैलेंडर के मुताबिक उन्हें समर्थन नहीं मिल रहा है। बाजारों में रौनक लौटने लगी है। सड़कों पर ट्रैफिक का लोड बढ़ा है।
निजी स्कूल संचालकों ने नए सत्र के लिए दाखिले की तैयारियां शुरू कर दी हैं। कश्मीर हिंसा का सबसे अधिक असर शिक्षा व्यवस्था पर ही पड़ा है। सोमवार से बोर्ड की परीक्षाएं भी शुरू हो रही हैं। पत्थरबाजी लगभग थम गया है। अवाम के रुख को भांपते हुए ही अलगाववादियों ने हुर्रियत (जी) के चेयरमैन सैयद अली शाह गिलानी के हैदरपोरा स्थित आवास पर बंद समर्थकों की बैठक बुलाई थी।
कहा जा रहा है कि बैठक इस वजह से बुलाई गई थी, ताकि लोगों से रायशुमारी कर बंद का आह्वान वापस ले लिया जाए और अपनी इज्जत बचाए रखा जाए। लेकिन हैदरपोरा आवास के बाहर जुटे लोगों के दबाव में अलगाववादियों को बंद जारी रखने का फैसला करना पड़ा। अब लोगों ने बंद के कैलेंडर का विरोध करना शुरू कर दिया है। टीआरसी के पास संडे मार्केट में रविवार को खरीदारों की जबरदस्त भीड़ दिखी।