कश्मीर घाटी के लगभग सभी छोटे-बड़े कसबों में अलगाववादियों द्वारा संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु की तीसरी बरसी पर बंद के आह्वान से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ।
सभी दुकानें, कारोबारी इदारे बंद रहे। सड़कों पर यातायात भी नहीं के बराबर देखने को मिला। यहां तक कि सरकारी दफ्तरों, बैंकों और अन्य कार्यालयों में भी हाजिरी नहीं के बराबर दिखी। बारामुला-बनिहाल रेल सेवा स्थगित रही।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सभी संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बल के जवानों की भारी तैनाती रही। जवानों को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रखा गया था।
इसके अलावा श्रीनगर के रैनावाड़ी, नौहट्टा, एमआर गंज, सफाकदल और क्रालखुड़ थाना क्षेत्रों के तहत आने वाले इलाकों में कर्फ्यू जैसी पाबंदी लागू की गई थी।
अलगाववादियों पर सोमवार से ही पुलिस ने शिकंजा कस रखा था। जेकेएलएफ चेयरमैन मोहम्मद यासीन मलिक समेत कई अन्य अलगाववादियों को पुलिस ने पहले ही हिरासत में ले लिया था।
कई अन्य अलगाववादियों को उनके घरों में नजरबंद किया गया था। अलगाववादी अफजल गुरु की अस्थियों की मांग कर रहे हैं। यह मांग नौ फरवरी 2013 के बाद से की जा रही है, जब अफजल को दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी दी गई थी।