स्कूलों की दीवारों पर दरारें साफ बता रहीं कि इनकी छत के नीचे बैठना खतरे से खाली नहीं
सतीश वालिया अंकित कुमार मिश्रा
जम्मू। तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है... ये लाइनें जम्मू-कश्मीर में प्राथमिक स्कूलों की हालत पर एकदम सटीक बैठती है। स्कूलों की दीवारों पर दरारें साफ बताती हैं कि इनके साये में बैठना खतरे से खाली नहीं। मगर, जिम्मेदारों ने इन्हें कागजों में 'सुरक्षित' दर्शाया है।
स्कूलों के बराबर में कूड़ा डंप किया जा रहा है जिसमें न जाने कितने खतरनाक कीटाणु पनप रहे हों, कोई नहीं जानता। राजस्थान के झालावाड़ में स्कूल की छत गिरने से बच्चों की मौत हुई थी लेकिन जम्मू-कश्मीर में बच्चों की जान को खतरे और भी हैं। अमर उजाला टीम ने जब विभिन्न स्कूलों की पड़ताल की तो हालात कुछ ऐसे दिखे...
दीवारों में दरारें, प्रिंसिपल ने बताया सुरक्षित...
जम्मू शहर के पीरखो में सरकारी प्राइमरी स्कूल का निर्माण सर्व शिक्षा अभियान के तहत 16 साल पहले 2009 में हुआ था। इस वक्त इस स्कूल में 36 बच्चे हैं। इन्हें पढ़ाने के लिए तीन शिक्षिकाएं हैं। दिक्कत यह है कि यह स्कूल केवल तीन कमरों में चलता है जिनमें से एक में कक्षा और कार्यालय दोनों साथ हैं। कमरे की दीवारों पर दरारें हैं। प्लास्टर जगह-जगह उखड़ा है, पेंट गायब है। बरसात की वजह से सीलन मुंह चिढ़ा रही है। इसने दीवारों को और खस्ताहाल कर दिया है।
स्कूल की प्रिंसिपल श्वीला अनंत हैं। उनकी नजर में ये दरारें मामूली हैं और वह इसे सेफ बताती हैं। स्कूल में लड़के और लड़कियों के लिए अलग शौचालय हैं जिनका निर्माण करीब 10 साल पहले स्वच्छ भारत अभियान के तहत किया गया था। इस स्कूल की इमारत देखकर कोई भी बता सकता है कि इसके टिकने की कोई गारंटी नहीं। इसकी दीवारों का प्लास्टर उखड़ा है और जगह-जगह काई उगी है जो बरसात के मौसम में दीवारों को कमजोर कर रही है। यह खतरनाक है। मिड डे मील किचन रसोई से ज्यादा स्टोर नजर आता है। इसके एक कोने में पुराना फर्नीचर डंप किया गया है। इतना ही नहीं, जंगला खुला पड़ा है। इसमें से कब कोई जीव आकर खाने-पीने की चीजों को खराब न कर दे, इसकी गारंटी नहीं।
बेलीचराना : स्कूल के बगल में ही कूड़ा, बीमारी को बुलावा
सतवारी जाेन में पड़ने वाले बेलीचराना स्थित सरकारी प्राइमरी स्कूल के बगल में ही कूड़ा डंप किया जाता है। काफी कूड़ा इसके दरवाजे पर भी पड़ा रहता है। इसमें दिन भर भैंस और कुत्ते खाना खोजते नजर आ जाएंगे। स्कूल की दीवार के साथ ही झाड़ियां उग आई हैं। इससे निकलकर कब सांप, बिच्छू या कोई अन्य जंगली जीव स्कूल में घुस आए कुछ कहा नहीं जा सकता... या यूं कहें कि बच्चे हर वक्त खतरे के साये में रहते हैं। यूं तो स्कूल में पुरानी इमारत के साथ ही नई इमारत बनकर तैयार हो गई है लेकिन इसकी खिड़कियां रखरखाव का अभाव चीख-चीख बयां करती हैं। खिड़कियों का कांच टूटा है। यह कब किसी विद्यार्थी का हाथ काट दे, किसी को पता नहीं।
सीढ़ी और रैंप टूटा... फिसलकर गिरने का खतरा बरकरार
रेजीडेंसी रोड पर गुज्जर नगर स्थित सरकारी प्राइमरी स्कूल में जाएंगे तो प्रवेश द्वार पर टूटी हुई सीढि़यां स्वागत करेंगी। रैंप का एक हिस्सा टूट चुका है। बरसात का मौसम है और इस पर काई जमी है। बच्चे ही नहीं, बड़े भी असंतुलित होकर गिरने से आशंकित रहते हैं। खतरा बरकरार है। प्रवेश द्वार पार करते ही कार्यालय मिलेगा। इसकी दीवारों का प्लास्टर पूरी तरह झड़ गया है। दीवार का साथ छोड़ते सीमेंट के पीछे की ईंटें साफ नजर आती हैं। इसकी छत भी सुरक्षित नहीं। बच्चों के चोटिल होने का खतरा हर वक्त है। छत काई से ढकी है। बीच में टूटी हुई जगह को पत्तों ने ढक लिया है। यह अलग बात है कि अभी तक यहां किसी तरह की कोई घटना नहीं हुई लेकिन हादसे कभी बताकर नहीं आते।
मिडिल और हाईस्कूल की भी हालत जुदा नहीं
जम्मू। केवल सरकारी प्राइमरी स्कूल ही नहीं बल्कि मिडिल और हाईस्कूल भी समुचित रखरखाव न होने से बच्चों के लिए खतरे के भवन बने हुए हैं। मिडिल स्कूल बख्शी नगर में चार कमने हैं। इनमें 11 कक्षाएं चलती हैं। अतिरिक्त कमरे नहीं हैं। इसकी इमारत को सात साल पहले वर्ष 2018 में असुरक्षित घोषित कर दिया गया था। बाद में मरम्मत कराई गई और दोबारा कक्षाएं शुरू की गईं। दोनों स्कूलों में सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक कक्षाएं लगती हैं। एक कमरे में 20 से ज्यादा छात्र बैठते हैं। स्कूल प्रशासन की ओर से कई बार बजट की मांग की गई मगर उम्मीद पूरी नहीं हुई।
अब जम्मू शहर के ही राजपुरा मंगोत्रियां के हाई स्कूल की बात करें तो यहां दो कमरे क्षतिग्रस्त हैं। इनमें प्राइमरी, मिडिल और दसवीं तक कक्षाएं लगाई जाती हैं। ये कमरे 35 साल पहले बने थे लेकिन उचित रखरखाव न होने से आज खतरे की जद में हैं। स्कूल में 120 से ज्यादा विद्यार्थियों का नामांकन है।
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मार्च में 765 स्कूल असुरक्षित थे, अब फिर होगा सोशल ऑडिट
जम्मू। प्रदेश में बच्चों को जर्जर स्कूली इमारतों में पढ़ाया जा रहा है। शिक्षा विभाग के अनुसार इस वर्ष मार्च में 765 स्कूल असुरक्षित घोषित किए जा चुके थे। शिक्षा निदेशालय की ओर से अब फिर से इनके सोशल ऑडिट की तैयारी है। मरम्मत के बावजूद कई स्कूल असुरक्षित हैं। इन्हें चिन्हित करने के लिए कमेटी का गठन किया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि अगर कोई स्कूल मरम्मत के बाद भी असुरक्षित श्रेणी में पाया तो उसके भवनों को गिराया जाएगा और नए का निर्माण कराया जाएगा। सोशल ऑडिट करने के लिए शिक्षा निदेशालय की टीम स्कूलों का दौरा करके अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में स्कूलों में अतिरिक्त भवन निर्माण के लिए फंड जारी होगा।
कब कितने भवन थे अनसेफ
- 2014-2015 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार जम्मू-कश्मीर में जर्जर स्कूलों की संख्या एक साल में दोगुनी होकर 474 से 948 हो गई।
- मार्च 2025 में 765 स्कूल भवनों को सुरक्षा ऑडिट के बाद असुरक्षित घोषित किया गया। इन भवनों का उपयोग शिक्षण उद्देश्यों के लिए न करने के आदेश किए गए।
सर्वे के बाद होगा असुरक्षित घोषित करने पर निर्णय
स्कूल भवनों का सोशल डिट होगा। इसके लिए कमेटी गठित की गई है। सर्वे के बाद रिपोर्ट सौंपी जाएगी। इसके बाद असुरक्षित घोषित किए जाने पर निर्णय होगा।
- मुश्ताक अहमद, उपनिदेशक, शिक्षा निदेशालय।