मेयर चंद्र मोहन गुप्ता के अनुसार कड़ाके की सर्दी में खुले में रात गुजारने के मामले की जानकारी मिलने भर से उन्हें कष्ट की अनुभूति हो रही है। लेकिन निगम के पास ऐसे लोगों को राहत पहुंचाने के लिए कोई इमारत नहीं है। भूमि की निशानदेही कर आसरा घर बनाने का प्रस्ताव जरूर है। इन लोगों को तत्काल राहत मिले इसके लिए वह डीसी व अन्य अधिकारियों के संज्ञान में मामला लाएंगे।
उम्र 10 से 12 साल, बहती नाक। जुबां पर बस यह शब्द बाबू जी, ठंड से जान निकलती है कंबल दे दीजिए। बालिका ने अपना नाम विदूरी बताया। उसने कहा वह परिवार के अन्य लोगों के साथ फ्लाईओवर के नीचे रहती है। कभी कभार कोई दानी कंबल आदि दे जाता है। कड़ाके की ठंड में खुले में नींद नहीं आती।
वहीं करीब छह महीने के बच्चे को गोद में लिए अपना नाम गीतिका बताने वाली महिला ने कहा कि वह राजस्थान के चित्तौड़गढ़ के रहने वाले हैं। गरीबी की वजह से रोजी-रोटी कमाने यहां आए हैं। गुब्बारे बनाते हैं और बेचते हैं। कोई सरकारी मदद उन्हें नहीं मिली। बच्चों की पढ़ाई भी नहीं हो पाती। वहीं नाम खेमराज उर्फ खेमा बताने वाले व्यक्ति ने बताया कि गरीबी की वजह से वह फ्लाईओवर के नीचे जिंदगी बिताने को मजबूर हैं।