गृह मंत्रालय की ओर से प्रायोजित व नेहरू युवा केंद्र जम्मू के सहयोग से शुक्रवार को जनजातीय युवा विनिमय कार्यक्रम के तहत तीन राज्यों के करीब दो सौ बच्चे शुक्रवार को भारत-पाक सीमा ऑक्ट्राय पोस्ट पर पहुंचे। झारखंड, महाराष्ट्र व उड़ीसा से पहुंचे यह बच्चे भारत-पाक सीमा देखकर काफी उत्साहित हुए।
मौके पर मौजूद 36 वीं वाहिनी सीमा सुरक्षा बल अधिकारियों व जवानों ने इन बच्चों को भारत-पाक सीमा के बारे में जानकारी देकर जीरो लाइन पर लगे पीपल के वृक्ष को भी दिखाया जो दोनों देशों की सीमा पर है। एक ओर भरतीय क्षेत्र में खेतों लगी गेहूं व अन्य फसल देखी। दूसरी ओर पाकिस्तान क्षेत्र में जीरो लाइन तक लगी फसल देखते हुए नजर आए। यहां पहुंचे बच्चे अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पहुंच कर काफी उत्साहित दिखे। सीमा देखने पहुंचे बच्चों ने भी दोनों देशों की सीमा के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी प्राप्त की।
बच्चों ने बताया कि वो बहुत खुश हैं कि आज उन्हें भारत-पाक सीमा को पहली बार देखने का मौका मिला है। झारखंड से आए धनड मुंडा, महाराष्ट्र के शनोच, रांची की आहिला गौड व सुख कुमारी ने बताया कि उन्होंने आज से पहले कभी भारत-पाक सीमा नहीं देखी।
उन्होंने बताया कि इससे पहले उन्होंने इस सीमा के बारे में किताबों में पढ़ा। आज उन्हें यहां पहुंच कर और दोनों देशों की सीमा को देखकर अच्छा भी लगा। यह भी देखकर हैरानी हुई कि कैसे दो देश सीमा कैसे बंटी हुई है।
उड़ीसा के कमोश व ओमसडी ने बताया कि उन्होंने हमेशा दोनों देशों के बीच गोलीबारी के होने के लिए सुना था। बच्चों ने सीमा पर की गई तारबंदी के बारे में सीमा सुरक्षा बल के अधिकारियों व जवानों से जानकारी प्राप्त की। उन्हें बताया कि बॉर्डर पर देश की सुरक्षा के लिए यहां तारबंदी की गई। वहीं सीमा पर रात के समय लगाई लाइटें जलाकर पैनी नजर रखी जाती है। ताकि किसी प्रकार की घुसपैठ होने पर उस पर पैनी नजर रखी जा सके।
जनजातीय युवा विनिमय के अंतर्गत पहुंचे बच्चों ने कहा कि दोनों देशों में शांति बनी रहे, ताकि लोगों की बेहतरी होने के साथ देश आगे बढ़ सके।
यहां बच्चों के साथ पहुंचे नेहरू युवा केंद्र जम्मू संयोजक निसार अहमद खान ने बताया कि यह बच्चे गृह मंत्रालय के 13 वें जनजातीय युवा विनिमय कार्यक्रम के तहत पहुंचे। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत यह बच्चे पांच अप्रैल तक जम्मू के विभिन्न इलाकों में जाएंगे। यहां के पर्यटन स्थल दिखाने के साथ यहां के लोगों के रहन-सहन के बारे में जानकारी मिलने के साथ यहां अपनी सांस्कृतिक की छटा बिखेरेंगे। वहीं अपनी संस्कृति से भी रूबरू कराएंगे।