सांबा जिला मुख्यालय से लगभग 23 किलोमीटर दूर पहाड़ी इलाके से पालकी में लाई गई गर्भवती को जिला अस्पताल में इलाज नहीं मिला। वहां से उसे जीएमसी जम्मू रेफर कर दिया गया। जहां उसकी हालत गंभीर होने पर ऑपरेशन किया गया तो पता चला कि शिशु की मौत गर्भ में ही हो चुकी थी। परिवारवालों का आरोप है कि यदि समय रहते सांबा में इलाज मिल जाता तो बच्चा बच सकता था।
बताया जाता है कि जिले के पहाड़ी पंचायत गौरण के अंतर्गत आने वाले गांव समोठा के सोहन लाल की पत्नी गर्भवती थी। उसकी तबीयत खराब होने पर परिवार वाले उसे पालकी से लेकर गौरण पहुंचे, वहां वाहन नहीं मिला तो महिला को लेकर पैदल पीएचसी सुंब पहुंचे। जहां से एंबुलेंस से सांबा पहुंचाया। इसके बाद उन्हें इमरजेंसी कॉल कर एंबुलेंस मिली। जब तक वह जम्मू पहुंचती बच्चे की पेट में ही मौत हो गई। जीएमसी में महिला का ऑपरेशन कर मृत बच्चे को निकाला गया।
परिवार वालों का आरोप है कि सांबा जिला अस्पताल में यदि महिला का उपचार हो जाता तो शिशु बच सकता था। इसी को लेकर परिवारवालों में जहां स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ रोष है वहीं जिला प्रशासन के खिलाफ भी भारी रोष है कि प्रशासन लोगों को आने जाने के लिए सड़क की सुविधा नहीं दिला सकता। महिला के पति सोहन लाल ने कहा कि इस खराब सड़क संपर्क के कारण ही बच्चे की मौत हुई है।
इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। फिर भी इस बारे में जांच की जाएगी। इस समय कोविड-19 के बढ़ रहे मामलों के चलते सारा विभाग उधर ही जुटा हुआ है। -डॉ. अंजु, बीएमओ