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Jammu Kashmir: 'हर किसी को घर के पास नहीं दी जा सकती सरकारी नौकरी', बोले मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला

Tue, 31 Mar 2026 12:19 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि हर किसी को घर के पास सरकारी नौकरी नहीं दी जा सकती, क्योंकि स्थानीय स्तर पर सभी पदों के लिए उपयुक्त उम्मीदवार नहीं मिलते और प्रशासनिक चुनौतियां बढ़ जाती हैं।
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मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला - फोटो : एजेंसी
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विस्तार
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मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि हर कोई घर के पास पर नौकरी ढूंढ़ रहा है। हर किसी को घर के पास नौकरी नहीं दी जा सकती। भर्ती या नियुक्तियों को स्थानीय स्तर तक सीमित रखने से प्रशासनिक कठिनाइयां पैदा होंगी। अतिरिक्त कैडर बनाने होंगे। हर पोस्ट के लिए ब्लॉक स्तर पर उपयुक्त उम्मीदवार नहीं मिलेंगे। आरक्षण कोटा पूरा नहीं होगा तो छूट देनी होगी जिससे मनमानी हो सकती है।

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मुख्यमंत्री ने विधायक निजामुद्दीन भट के निजी विधेयक के प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि बीते दिनों डॉक्टरों की भर्ती के दौरान सामने आया कि वे घर के आसपास नौकरी चाहते हैं। ज्यादातर डॉक्टर सिफारिश करा रहे थे कि वे घर से दूर नहीं जा सकते।

मुख्यमंत्री ने कहा, ऐसा नहीं है कि श्रीनगर का डॉक्टर किश्तवाड़ जाने से इन्कार कर रहा हो या कठुआ का डॉक्टर कुपवाड़ा भेज दिया गया हो। फिर भी गांदरबल का डॉक्टर बांदीपोरा जाने को तैयार नहीं है जबकि मुश्किल से एक घंटे का सफर होगा। वो कहते हैं जनाब हमारे लिए बहुत समस्या है, हमें नजदीक ट्रांसफर कर दो।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती को स्थानीय स्तर तक सीमित करने पर पदों के लिए उपयुक्त लोग नहीं मिलेंगे। ऐसे में हमें छूट देनी पड़ेगी। जैसे छूट की बात आती है मनमर्जी शुरू हो जाती है। उन्होंने कहा, बड़े ब्लॉक में पदोन्नति के ज्यादा मौके मिलेंगे जबकि छोटे ब्लॉक में अवसर सीमित हो जाएंगे। इससे एक ही समय में भर्ती हुए कर्मचारियों के बीच असमानता पैदा होगी। इससे नाइंसाफी होगी।

उमर ने कहा कि सदस्य की ओर से उठाया गया मुद्दा ध्यान देने योग्य है लेकिन विधेयक एक उपयुक्त समाधान नहीं है। उन्होंने इसे वापस लेने का आग्रह किया। सरकार इस चिंता को दूर करने के लिए वैकल्पिक उपायों पर विचार करेगी। इस पर भट ने प्रस्ताव वापस ले लिया।

धार्मिक स्थल पर कब्जा करने वालों पर होगी कार्रवाई : उपमुख्यमंत्री
उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने कहा है कि धार्मिक स्थल पर कब्जा करने का किसी को अधिकार नहीं है। कोई भी ऐसा करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। उपमुख्यमंत्री चौधरी चिनैनी से भाजपा विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया की ओर से पेश निजी विधेयक के प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब दे रहे थे।

चाैधरी ने कहा, प्रदेश सरकार ने मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और गिरजाघर की सुरक्षा पुख्ता की है। विधायक मनकोटिया ने प्रदेश में मंदिरों के संरक्षण और अवैध रूप से कब्जा की गई भूमि की वापसी के लिए एक विधेयक पेश करने की अनुमति के लिए प्रस्ताव सदन में रखा था। उन्होंने कहा, 1987 के बाद 50 हजार मंदिर थे। आतंकवाद के दौर में मंदिरों को आग लगा दी गई और इनकी जमीन पर कब्जा कर लिया गया। इस बाबत 96 एफआईआर दर्ज हैं। ऐसे 1842 मंदिर चिह्नित किए गए हैं। केंद्र सरकार ने कुछ मंदिरों का जीर्णाेद्धार कराया है। ये मंदिर पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हैं। इनकी मरम्मत कराई जाए ताकि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सके।
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सीएम से जवाब की मांग को लेकर विपक्ष का हंगामा
उपमुख्यमंत्री के जवाब देने के लिए उठते ही विपक्ष के विधायकों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। विधायकों ने कहा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ही इसका जवाब दें। इस पर विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने कहा कि मुख्यमंत्री किसी को भी जवाब के लिए अधिकृत कर सकते हैं। बाद में ध्वनि मत से यह प्रस्ताव गिर गया।
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