राहत के कदम
कार्यालयों में काम का बोझ होगा कम
रोजगार के लिए नहीं करना होगा लंबा इंतजाम
योग्यता के आधार पर मिल सकेगा युवाओं को रोजगार
निजी क्षेत्र में मनपसंद क्षेत्र में भी मिलेगा काम करने का मौका
दिहाड़ी मजदूरों की नियमितीकरण पर पैनल की रिपोर्ट का इंतजार: उमर
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार दिहाड़ी मजदूरों के नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करने से पहले एक पैनल की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। पिछले साल 19 मार्च को अब्दुल्ला ने दिहाड़ी मजदूरों के नियमितीकरण के मुद्दे पर विचार करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति के गठन की घोषणा की थी और कहा था कि अगले बजट सत्र में सदन के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए एक रोडमैप तैयार किया जाएगा।
जम्मू-कश्मीर में हजारों दिहाड़ी मजदूरों का नियमितीकरण एक प्रमुख मुद्दा बना हुआ है, क्योंकि इनमें से अधिकांश श्रमिक लगभग तीन दशकों से विभिन्न सरकारी विभागों में सेवाएं दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने यहां बजट के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, समिति द्वारा अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने और हमें सौंपने के बाद, हम चरणबद्ध, योजनाबद्ध और पारदर्शी तरीके से नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करेंगे। विधानसभा में अपनी सरकार का दूसरा बजट पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार दैनिक वेतनभोगी, आकस्मिक और अस्थायी श्रमिकों की लंबे समय से चली आ रही आकांक्षाओं से पूरी तरह अवगत है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में और सीमित नौकरी सुरक्षा के साथ वर्षों तक प्रशासन की सेवा की है।
जून तक 32 हजार और लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य
प्रदेश सरकार के शुक्रवार को आए बजट में महिलाओं का भी ध्यान रखा गया है। अटल अंत्योदय योजना के तहत उनके लिए साल में छह मुफ्त सिलिंडर का प्रावधान किया गया है। वहीं, लखपति दीदी पहल के तहत आगामी जून तक 32 हजार और लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। अभी यह संख्या लक्ष्य से पीछे चल रही है। बीते वर्ष 2.33 लाख लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अभी तक करीब दो लाख, 952 महिलाएं लखपति दीदी बनी हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बजट पेश करते हुए इस संख्या को मिशन युवा के साथ मिलाकर सक्रिय रूप से बढ़ाने की घोषणा की है।