सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर शनिवार को अपने ही विश्वविद्यालय में ‘कानून के डॉक्टर’ (मानद) की उपाधि ग्रहण करने के दौरान भावुक हो गए। उनकी आंखों में से आंसू टपकने लगे।
उनकी भावुकता का आलम यह रहा कि वह मंच पर बमुश्किल अपने को संभाल पाए। ज्यादातर समय उन्हें अपनी भावनाओं को संभालने में लगा। कई बार उन्हें अपना वक्तव्य रोकना पड़ा।
जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एनएन वोहरा से डिग्री ग्रहण करने के बाद जस्टिस ठाकुर ने कहा, ‘इस मौके पर मैं अपने शिक्षक को श्रद्धांजलि देता हूं और यह डिग्री अपने माता-पिता को समर्पित करता हूं।’ उन्होंने कहा कि यह दूसरा अवसर है, जब उन्हें ‘कानून के डॉक्टर’ की डिग्री प्रदान की गई। इससे पहले लखनऊ में उन्हें यह सम्मान मिला था।
'अन्य राज्यों से छोटा होने के बावजूद मानव संसाधन में कम नहीं जेएंडके'
छात्रों को संबोधित करते चीफ जस्टिस
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सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा, ‘अन्य राज्यों की तुलना में जनसंख्या के आधार पर जम्मू-कश्मीर काफी छोटा राज्य है। हम उत्तर प्रदेश और अन्य कई राज्यों की जनसंख्या का 10वां हिस्सा हैं। लेकिन, जब हम मानव संसाधन की बात करते हैं, तो यह आकार किसी भी मायने में उन राज्यों के मुकाबले छोटा नहीं है।’
दीक्षांत समारोह में डिग्री हासिल करने वाले विद्यार्थियों से उन्होंने कहा कि यदि आप में योग्यता है तो आपको लक्ष्य हासिल करने के उचित अवसर मिलेंगे। उन्होंने युवाओं का संबोधित करते हुए कहा, ‘मैं सरकारी स्कूल और सरकारी कालेज में पढ़ा।
मुझे याद है स्कूल की फीस नहीं होती थी, लेकिन, उन्हें 15 पैसे शुल्क देना पड़ता था। शिक्षक काफी माहिर थे। उनमें विद्यार्थियों को तराशने और उन्हें जीवन के संघर्ष के लिए तैयार करने की क्षमता थी।’ चीफ जस्टिस ने जम्मू विश्वविद्यालय की देश के अन्य विश्वविद्यालयों से तुलना करते हुए कहा कि पिछले 46 सालों में यूनिवर्सिटी ने कई शिक्षाविद्, न्यायविद और विद्वान देश की सेवा में समर्पित किए हैं।