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जापान ने लटकाया चिनाब प्रोजेक्ट, जानिए पूरा मामला

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रियासत की शीतकालीन राजधानी जम्मू में चिनाब दरिया से पेयजल आपूर्ति परियोजना फंड के फेर में लटकी गई है।
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पिछले करीब तीन साल से लंबति परियोजना के लिए सरकार ने इकोनामिक रिकंस्ट्रक्शन एजेंसी (इरा) को एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) से परियोजना के लिए लोन हासिल करने का जिम्मा सौंपा था।

बहरहाल एडीबी ने परियोजना के लिए लोन जारी करने का प्रस्ताव मंजूरी नहीं किया। अब परियोजना के लिए फंड हासिल करने का प्रस्ताव जापान बैंक आफ इंटरनेशनल कामर्स के पास भेजा गया गया है।
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लोन पर अटका चिनाब परियोजना का भविष्य

आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एडीबी की ओर से परियोजना के प्रस्ताव को मंजूर नहीं किए जाने के बाद जापान बैंक आफ इंटरनेशनल कामर्स के पास प्रस्ताव को भेजा गया है।

जापानी बैंक के लोन की मंजूरी पर अब चिनाब पेयजल परियोजना का भविष्य लटका हुआ है।

शीतकालीन राजधानी जम्मू शहर के लगातार होते जा रहे विस्तार और पर्यटकों और विस्थापितों की संख्या को देखते हुए मौजूदा समय में सभी स्रोतों को मिलाकर भी पेयजल की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही।

परियोजना शुरू होने का बेसब्री से इंतजार

पीएचई विभाग जम्मू के चीफ इंजीनियर सुशील आइमा का कहना है कि चिनाब पेयजल परियोजना के शुरू होने का बेसब्री से इंतजार है। सरकार ने इरा को परियोजना के लिए फंड हासिल करने का जिम्मा दिया हुआ है।

उनका कहना है कि उनकी सूचना के अनुसार और हाल ही में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की ओर से जम्मू में ली गई उच्च स्तरीय बैठक में बताया गया कि एडीबी ने परियोजना के लिए फंड जारी करने का प्रस्ताव मंजूर नहीं किया है।

अब प्रस्ताव को जापान बैंक आफ इंटरनेशनल कामर्स के पास लोन हासिल करने के लिए भेजा गया है।
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प्यास बुझाने में कम पड़ रहा तवी का पानी

शीतकालीन राजधानी जम्मू शहर में पेयजल की मांग और उपलब्धता में अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है। हालत तो यहां तक पहुंच गई है कि पेयजल की मांग करीब 47 मिलियन गैलन डेली (एमजीडी) तक पहुंच चुकी है।

तवी में चल रही पेयजल परियोजनाओं और प्लांटों के अलावा ओवर हैंड टैंक आदि सभी स्रोतों को मिलाकर भी करीब 44 मिलियन गैलन पेयजल ही उपलब्ध हो पा रहा है।

चिनाब परियोजना को शुरू करने में अगर देरी हुई तो फिर आने वाले सालों में जम्मू में पेयजल की समस्या विकराल रूप धारण कर लेगी।
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