अस्पतालों में एक निजी कंपनी की ओर से खोली जा रही दवा की दुकानों के विरोध में वीरवार से दवा विक्रेता (होलसेल व रिटेल) तीन दिनी हड़ताल पर चले गए। शहर के प्रमुख अस्पतालों जीएमसी, एसएमजीएस, गांधीनगर सहित आसपास के क्षेत्रों में हड़ताल का ज्यादा असर दिखा। दवा विक्रेताओं ने शालामार अस्पताल के बाहर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर नारेबाजी की।
शुक्रवार से आंदोलन को तेज करते हुए उधमपुर, कठुआ सहित अन्य दूसरे जिलों में दवा की दुकानें बंद करवाने का काम किया जाएगा। पहले ही दिन हड़ताल से मरीज बेहाल रहे। दवा विक्रेताओं की हड़ताल पर शहर में ज्यादा असर रहा। बख्शीनगर, शालामार, सरवाल, गांधीनगर सहित अन्य इलाकों में लगभग दवा की दुकानों पर दिनभर ताले लगे रहे।
जम्मू-कश्मीर केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन शुक्रवार से जिला स्तर पर आंदोलन को आगे बढ़ाएगी। एसोसिएशन के संयोजक रोहित शर्मा और जम्मू केमिस्ट एसोसिएशन के प्रधान नवीन बाली ने बताया कि जिला स्तर के दवा विक्रेताओं को हड़ताल के लिए सूचित कर दिया गया है और शुक्रवार से इसका असर दिखेगा।
शहर के प्रमुख अस्पतालों में पहले ही सरकारी कोआपरेटिव दवा की दुकानें चल रही हैं। ऐसे में निजी कंपनी को दवा की दुकानें खोलने का अधिकार देने का कोई तुक नहीं है। इससे धड़ल्ले से घटिया स्तर की दवाओं को अस्पतालों के भीतर बेचकर मरीजों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। इसकी कई शिकायतें अस्पताल प्रशासनों के पास भी आई हैं। इस मामले को स्वास्थ्य मंत्री के समक्ष भी उठाया गया है।
उक्त कंपनी को जम्मू संभाग में 57 दुकानें अलाट की गई हैं, जो सभी सरकारी अस्पतालों में खोली जानी हैं। उन्होंने बताया कि जम्मू संभाग में होलसेल और रिटेल की करीब पांच हजार दवा की दुकानें हैं।
इससे पूर्व गत 30 जनवरी को भी एसएमजीएस अस्पताल में निजी कंपनी द्वारा अस्थायी दवा की दुकान का ढांचे का निर्माण करने के विरोध में दवा विक्रेताओं ने आधा दिन हड़ताल रखी थी। इसके बाद सीडी अस्पताल में दोबारा अन्य दुकान का ढांचा खड़ा करने के विरोध में दवा विक्रेताओं ने तीन दिन की हड़ताल का ऐलान किया। दोनों ही जगहों पर दवा विक्रेताओं की ओर से ढांचों के निर्माण का काम बंद करवा दिया गया था।