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'कट्टरपंथियों को खुश करने में जुटी उमर सरकार'

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रियासत की नेकां-कांग्रेस साझा सरकार ने अपनी खामियों को छिपाने के लिए अब धार्मिक मामलों में दखल के अलावा अवाम पर अनावश्यक आर्थिक बोझ लादने संबंधी फैसले लेना शुरू कर दिया है।
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कौसर नाग यात्रा को कुलगाम जिले से शुरू होने की इजाजत नहीं देने का इसका ताजा प्रमाण है।

पूर्व केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री और जम्मू वेस्ट से विधायक प्रो. चमन लाल गुप्ता ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की।

उन्होंने कहा कि साझा सरकार के इस कदम से राज्य के राष्ट्रवादी समाज का मनोबल गिरा है।
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'अमरनाथ भूमि जनांदोलन जैसे हालात'

प्रो. गुप्ता ने पत्र में स्पष्ट किया है कि साढ़े पांच साल पूर्व नेकां-कांग्रेस ने अवाम से जो वादे किए थे, वह पूरे नहीं हुए। अब अवाम को गुमराह करने और ध्यान भटकाने के लिए अलगाववादियों की मांगें पूरी करने में नेकां-कांग्रेस सरकार जुट गई है।

प्रो. गुप्ता ने कहा कि राज्य में सरकार गिलानी, मीरवायज अथवा यासीन मलिक नहीं उमर अब्दुल्ला चला रहे हैं। इसलिए सभी धर्मों से संबंधित लोगों की भावनाओं का ख्याल रखना सीएम की जिम्मेदारी है।

उन्होंने मुख्यमंत्री को आगाह किया कि वह रियासत में अमरनाथ भूमि जनांदोलन जैसे हालात पैदा करने की कोशिश न करे अन्यथा उनको भी राज्यसभा में नेता विपक्ष आजाद जैसा खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
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मांगे 2,000 करोड़ म‌िले 60 करोड़

प्रो. गुप्ता ने नेकां, पीडीपी और कांग्रेस नेताओं के भी कौसर नाग यात्रा को स्थगित किए जाने पर खामोशी धारण करने पर सवाल उठाए।

प्रो. चमन लाल गुप्ता ने कहा कि पिछले साढ़े पांच साल में साझा सरकार जम्मू कश्मीर में बीस मेगावाट ही बिजली उत्पादन में बढ़ोतरी कर सकी, लेकिन बिजली खरीद और आपूर्ति पर घाटे में आठ फीसदी की बढ़ोतरी हुई।

इसके बावजूद सरकार ने बगैर किसी योजना के नई प्रशासनिक इकाइयों का गठन भी कर दिया।

बकौल प्रो गुप्ता इसके लिए सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने के लिए दो हजार करोड़ रुपये का फंड चाहिए, लेकिन सरकार ने महज साठ करोड़ रुपये का इंतजाम किया है।
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