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फायरिंगः चकरोई हाई स्कूल बना गुज्जर बस्ती

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सीमांत इलाकों का चकरोई हाई स्कूल सामान्य दिनों में छात्र-छात्राओं की किलकारियों से गूंजता रहता है लेकिन बुधवार को स्कूल परिसर में बच्चे नजर नहीं आए। चारों ओर भैंस और अन्य पशु बंधे थे। क्लास रूम के बरामदे में महिलाएं खाना बनाने में व्यस्त थीं।
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कक्षाओं में सीमांत इलाकों के लोगों का सामान भरा था। जो गांव छोड़ने से पहले अपने साथ लेकर पहुंचे थे। ज्योड़ा फार्म में सुबह हुई गोलाबारी के बाद गांव के लोगों ने अपने घरों को खाली छोड़ इसी स्कूल में पनाह ली है।

स्कूल का लान काफी बड़ा है लेकिन चारों ओर पशु ही पशु नजर आ रहे हैं। यूं कहे कि स्कूल गुज्जर बस्ती में तब्दील हो गया तो गलत नहीं होगा। इन सबके बीच गुज्जरों के नन्हे बच्चे बिना किसी भय के स्कूल में खेलते नजर आए।
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लोग एक-एक कर समेट रहे अपना सामान

उन्हें यह तो पता था कि उनके गांव में गोले चले हैं, लेकिन किसने चलाए, यह नहीं पता। गुज्जर महिलाएं बैलगाड़ियों में लाए जरूरी सामान को क्लास रूम में रखने में व्यस्त नजर आईं। जिसमें राशन से लेकर पशुओं का चारा है।

स्कूल के बरामदे में एक ओर खाना बनाने के लिए लकड़ियां जलाने की कोशिश कर रही परवीन बीबी का कहना है कि कम से कम यहां गोलाबारी से तो बच्चों की सुरक्षा हो जाएगी। गांव में कच्चे मकान हैं। खुले में पशु बंधे होते हैं।

इसलिए हमेशा गोलाबारी से नुकसान होने का खतरा बना रहता है। पिछले कुछ दिनों से बच्चों को घर के अंदर ही रख रहे थे लेकिन कब तक ऐसा करेंगे। जमात अली ने कहा कि सुबह से ही गोलाबारी होने के कारण वे भैंस और गायों का दूध तक नहीं निकाल पाए।

अब शाम को दूध निकाल ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे। हालांकि पशुओं का चारा समस्या बना हुआ है। उधर, स्कूल में गुज्जरों के पहुंचने के कारण अगले कुछ दिनों तक स्कूल में पढ़ाई नहीं होगी। छुट्टियां घोषित कर दी गई हैं। प्रशासनिक अफसरों के अनुसार जल्द इनकी व्यवस्था कर स्कूल को शुरू कराएंगे।
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