संसद में बिल लाना होगा
यदि केंद्र सरकार ने परिसीमन आयोग का गठन किया तो इसके लिए संसद में बिल लाना होगा। चूंकि, राज्य में राष्ट्रपति शासन है। इस वजह से इसे राज्य के संविधान के अनुसार यहां से मंजूरी मिल जाएगी। इसलिए लोगों को संसद सत्र का इंतजार है।
राजनीतिक असंतुलन होगा खत्म
राजनीतिक पार्टियों का मानना है कि नए सिरे से परिसीमन होने से राज्य में राजनीतिक असंतुलन खत्म होगा। कश्मीर का सत्ता में वर्चस्व समाप्त हो जाएगा। कश्मीर में 349 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल पर एक विधानसभा है, जबकि जम्मू में 710 वर्ग किलोमीटर पर। परिसीमन के लिए पांच चीजों को आधार बनाया जाता है जिसमें क्षेत्रफल, जनसंख्या, क्षेत्र की प्रकृति, कम्युनिकेशन सुविधा तथा इससे मिलता-जुलता अन्य कारण। पार्टियों का मानना है कि क्षेत्रफल अधिक होने के साथ ही क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति भी विषम है। कम्युनिकेशन सुविधाओं का अभाव है। ऐसे में सभी परिस्थितियां जम्मू संभाग के हक में हैं।
अमरनाथ सुरक्षा का लिया जायजा
उधर, जल्द शुरू होने वाली अमरनाथ को लेकर भी गृह मंत्री शाह ने चर्चा की। मंगलवार को अमरनाथ यात्रा के सुरक्षा इंतजामों को लेकर उन्होंने गृह सचिव गाबा, जम्मू कश्मीर डिवीजन के एडिशनल सेक्रेटरी और खुफिया विभाग के अधिकारियों के साथ मुलाकात की। शनिवार को राज्यपाल मलिक से भी शाह ने यात्रा की सुरक्षा को लेकर बातचीत की थी।
सभी परिस्थितियों के अनुसार जम्मू संभाग का हिस्सा अधिक बनता है। हमें हमारा हक चाहिए। इसके लिए पार्टी लगातार आवाज बुलंद करती रही है। 2002 में जब फारूक सरकार ने परिसीमन पर रोक लगाई थी तब भी विधानसभा में विरोध किया गया था। - हर्षदेव सिंह, चेयरमैन-पैंथर्स पार्टी