मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद भाजपा और पीडीपी के बीच दूरियां घट सकतीं हैं। साथ ही केंद्र की ओर से हुर्रियत से बातचीत की पहल हो सकती है, लेकिन संविधान के दायरे में वार्ता का पेंच अब भी फंसा हुआ है।
एमएलसी चुनाव और पत्थरबाजों पर दोनों दलों के अलग-अलग स्टैंड से रिश्ते में खटास बढ़ी। मोदी और गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर महबूबा ने गठबंधन में आ रही दरार को पाटने की कोशिश की है।
फिलहाल, वह अपने एजेंडे में कामयाब भी दिख रही हैं। इस मुलाकात के बाद इतना तय हो गया है कि तमाम मनमुटाव के बावजूद गठबंधन सरकार चलती रहेगी। भड़काऊ और आपसी रिश्ते को खराब करने वाले बयान देने वाले नेताओं पर दोनों दलों ने बैन लगा दिया है।
उदारवादी धड़ों से हो सकता है संपर्क
पीएम नरेंद्र मोदी
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महबूबा की पीएम मोदी से मुलाकात के पहले ही भाजपा महासचिव राम माधव और पीडीपी मंत्री डा. हसीब द्राबू ने आपसी सहमति के बिंदु तय कर लिए थे। पीडीपी की ओर से भाजपा आलाकमान को कहा गया राज्यपाल शासन की चर्चा से वैसे तत्वों को मजबूती मिल रही है जो हालात और खराब करना चाहते हैं।
पीडीपी ने ऐसी चर्चाओं पर तत्काल विराम लगाने पर जोर दिया। पत्थरबाजों पर भाजपा की ओर से कठोर बयानबाजी पर भी पीडीपी ने एतराज जताया। सूत्रों के मुताबिक इस बात पर सहमति बन गई है कि दोनों पार्टियां अपनी-अपनी विचारधाराओं को प्रकट करती रहेंगी, लेकिन इस क्रम में एक-दूसरे को आहत नहीं किया जाएगा।
पीडीपी सूत्रों के मुताबिक भाजपा आलाकमान को यह बताया गया है कि हुर्रियत से बातचीत शुरू किए बगैर अमन बहाली मुश्किल हो सकती है। इस मुद्दे पर रियासत सरकार की ओर से अलगाववादियों से सहयोग की अपील की जाएगी। केंद्र फिलहाल संविधान के दायरे में बातचीत के स्टैंड को बदलना नहीं चाहता है।
वार्ता के लिए पहले उदारवादी धड़ों से संपर्क साधा जाने वाला है। वर्तमान की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि विरोध प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शिरकत करने लगे हैं। इनमें किराए पर पत्थर फेंकने वाले बहुत कम संख्या में हैं। छात्रों का गुस्सा कम करने के लिए पीडीपी सिविल सोसाइटी और बुद्धिजीवियों की मदद लेगी।
आतंकियों ने सियासी एक्टिविस्टों के लिए इस्तीफे
आतंकियों ने सियासी एक्टिविस्टों के लिए इस्तीफे
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कश्मीर के बिगड़े हालात में सियासी नेताओं पर खतरा और बढ़ गया है। छात्रों के रोष भरे प्रदर्शनों के बीच आतंकी संगठन राजनीतिक कार्यकर्ताओं को निशाना बनाकर माहौल ज्यादा खराब करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। श्रीनगर उपचुनाव के बाद आतंकियों और उपद्रवियों ने कुलगाम, पुलवामा, शोपियां और अनंतनाग में 100 से अधिक सियासी एक्टिविस्टों के इस्तीफे लिए हैं। इस्तीफे के बाद इन कार्यकर्ताओं से मस्जिदों में माफी मंगवाने का वीडियो भी तैयार किया जा रहा है।