यकीन मानिए 10 वर्ष बाद ही सही पर आप दो घंटे में पठानकोट से भद्रवाह तक पहुंच जाएंगे। आज के समय में इस दूरी को तय करने में कम से कम 10 घंटे का समय लगता है। ऐसा संभव होगा क्योंकि अभी के खस्ता हाल पठानकोट-बसोहली-बनी-छत्तरगला टाप-भद्रवाह सड़क मार्ग को अंतराज्यीय राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने के बाद केन्द्र सरकार ने इसका निर्माण कार्य अगले वर्ष से शुरू करवाने का फैसला ले लिया है। वहीं छत्तरगला टाप पर बनने जा रही है 6.8 किमी लम्बी टनल जिससे कठुआ जिले के पर्वतीय क्षेत्रों के साथ साथ जिला डोडा के पूरे इलाके का चहुंमुखी विकास होगा ।
अभी पठानकोट से भद्रवाह तक का यह सड़क मार्ग 170 किमी लंबा है जिसमें पठानकोट से बसोहली तक सड़क ठीक है और उसके बाद बनी से आगे सरथल तथा छत्तरगला टाप तक सड़क की हालत खराब है। वहीं छत्तरगला टाप से भद्रवाह तक का मार्ग बहुत ही ज्यादा खस्ता हाल है।
इस पूरे क्षेत्र के सांसद व पी एम ओ में राज्यमंत्री डॉ.जितेन्द्र सिंह के प्रयास से केन्द्र सरकार के सड़क परिवहन मंत्रालय ने न केवल इसे अंतराज्यीय राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित कर इसका निर्माण कार्य जल्द शुरू करवाने का फैसला लिया बल्कि छत्तरगला टाप पर टनल निर्माण भी तेजगति से कराने का मन बना लिया है। हालांकि इस पूरे निर्माण कार्य में दस वर्ष का समय लगेगा पर एक दशक बाद न केवल मिनी कश्मीर कहे जाने वाले भद्रवाह में मनाली का रुख करने वाले देश भर के पर्यटक आएंगे बल्कि पूरे इलाके का संपूर्ण विकास होगा।
कुछ इस तरह आप दो घंटे में पठानकोट से पहुंचेगे मिनी कश्मीर तक
170 किमी लम्बे इस मार्ग पर टनल बन जाने से जहां एक तरफ की दूरी 30 किलोमीटर कम हो जाएगी वहीं पूरे मार्ग पर घुमावदार पर्वतीय रास्तों को सीधा करने के साथ साथ कई छोटी टनल तथा पुलों का निर्माण होने से 30 किलोमीटर और रास्ता कम होने की बात डीटेल्ड प्रोजेक्ट रिर्पोट में (डीपीआर) में कही गई है। इससे यह राष्ट्रीय राजमार्ग मात्र 110 किमी रह जाएगा जिससे दो घंटे या उससे कुछ अधिक समय में आसानी से पूरा किया जा सकता है।
इस निर्माण को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा: डॉ. जितेन्द्र सिंह
सांसद व पीएमओ में राज्यमंत्री डॉ.जितेन्द्र सिंह ने अमर उजाला को बताया कि यह उनके संसदीय क्षेत्र का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है जिसको लेकर वह पिछले दो वर्ष से प्रयास कर रहे हैं और अब जब कि इस मार्ग को अंतराज्यीय राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित कर दिया गया है तो वह सुनिशिचत करेंगे कि पूरा निर्माण कार्य समयबद्ध तरीके से हो। छत्तरगला टाप पर टनल निर्माण भी उनका सपना है जिसमें कम से कम दस वर्ष का समय लगेगा पर इससे पूरे क्षेत्र का नक्शा ही बदल जाएगा।