गौरतलब है कि 10 मई को उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार की एक विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी थी। याचिका में केंद्र ने कहा था कि इस तरह के फैसले नीतिगत फैसलों के दायरे में हैं और इन पर अदालतों को फैसला नहीं करना है। विसंगति को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने वाले सीएपीएफ के सेवानिवृत्त अधिकारी के वकील अंकुर छिब्बर ने बताया कि एसएलपी पिछले हफ्ते शीर्ष न्यायालय ने खारिज कर दी। इस तरह अब सरकार को मई के अंत तक दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को लागू करना होगा। अदालत ने 31 जनवरी को कहा था कि सेवानिवृत्ति की उम्र के मामले में सभी रैंकों और बलों में एकरूपता बरती जानी चाहिए। छिब्बर ने कहा कि यहां तक कि सातवें वेतन आयोग ने भी ऐसा ही कहा है। छह सीएपीएफ में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ)और असम राइफल्स शामिल हैं।
अलग-अलग बल नियम भी जुदा
मौजूदा नीति के मुताबिक सीआईएसएफ और असम राइफल्स में सभी कर्मी 60 साल की उम्र में सेवानिवृत्त होते हैं जबकि शेष चार बलों में कांस्टेबल से कमांडेंट (वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के समकक्ष) की सेवानिवृत्ति उम्र 57 साल है। वहीं, उनसे ऊपर के अधिकारी 60 साल में सेवानिवृत्त होते हैं।
कोर्ट ने सरकार को दिया था चार माह का वक्त
दिल्ली उच्च न्यायालय ने जनवरी में अपने आदेश में चार अर्द्धसैनिक बलों (सीआरपीएफ , बीएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी) में सेवानिवृत्ति की विभिन्न उम्र की मौजूदा नीति को भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक करार दिया था। साथ ही कहा था इसने सशस्त्र बलों में दो वर्ग बना दिए हैं। अदालत ने सरकार को आदेश लागू करने के लिए चार महीने का वक्त दिया था।