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भाजपा ने गिलानी के सामने रखी 'गदर' जैसी फिल्मी शर्त

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सनी देओल की फिल्म गदर में जैसी शर्त 'तारा सिंह' के सामने रखी गई थी कुछ वैसी ही शर्त अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के सामने रखी गई थी। तारा सिंह को पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा लगाने को कहा गया था, गिलानी के सामने भी कुछ ऐसे ही हालात हैं।
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गिलानी के पासपोर्ट विवाद पर प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह ने कहा है कि अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के पासपोर्ट मामले में विदेश मंत्रालय जरूरी निर्णय लेगा। इस संबंध में प्रावधान पहले से तय हैं। नियमों और तथ्यों के आधार पर गिलानी के मामले में भी फैसला होगा।

उन्होंने कहा कि पासपोर्ट पर निर्णय विदेश मंत्रालय ही करेगा। उधर भाजपा के रियासत अध्यक्ष सांसद जुगल किशोर शर्मा ने कहा है कि गिलानी को पहले स्वीकार करना चाहिए कि वह भारतीय हैं। उन्होंने कहा कि पासपोर्ट जारी करने के बारे में एक प्रक्रिया निर्धारित है। हर मामले में उस प्रक्रिया का पालन होता है।
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गिलानी के मामले में वह मैकेनिज्म काम करेगा। केंद्रीय मंत्री सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि विदेश मंत्रालय इस मामले पर गौर कर रहा है और वह आश्वस्त हैं कि नियमों के तहत जरूरी फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर वह प्रतिक्रिया देने की स्थिति में नहीं हैं।

खुद को भारतीय नहीं मानते गिलानी

गौरतलब है कि गिलानी अपनी अस्वस्थ पुत्री के मिलने के लिए सउदी अरब जाना चाहते हैं और इसके लिए उन्होंने पासपोर्ट का आवेदन दिया है। गिलानी खुद को भारतीय नहीं मानते हुए आजाद कश्मीर की वकालत करते रहे हैं। विदेश मंत्रालय की अनुमति के बगैर उनका सऊदी अरब जाना संभव नहीं हो पाएगा। भाजपा ने गिलानी के मामले में सख्त रुख अपनाया है।

पार्टी के प्रवक्ता खालिद जहांगीर ने कहा है कि गिलानी को पहले केंद्र और भारतीय अवाम से माफी मांगनी चाहिए। पासपोर्ट भारतीय नागरिकों को दिए जाते हैं। इसे हासिल करने के लिए गिलानी को पहले खुद को भारतीय घोषित करना पडे़गा। पीएमओ राज्यमंत्री ने मोदी के विदेशी दौरों पर कहा कि विश्व के तमाम देश प्रधानमंत्री को आमंत्रित कर रहे हैं।
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'विपक्ष के पास नहीं बचा कोई काम'

हकीकत यह है कि अब दुनिया भारत को भविष्य की विश्व शक्ति के रूप में देख रही है। विदेशों में अलग-अलग देशों के नागरिक उनके स्वागत को उमड़ रहे हैं। विपक्ष द्वारा दौरे की आलोचन करने पर डा. सिंह ने कहा कि उनके पास आलोचना करने के सिवा कोई काम नहीं बचा।

दिल्ली में आईएएस अफसर की नियुक्ति को लेकर छिड़े विवाद पर सिंह ने कहा कि मैं इस मुद्दे पर कुछ कहना नहीं चाहता, लेकिन व्यक्तिगत तौर पर मेरा आग्रह यह है कि सिविल सर्विस के अफसरों के किसी भी मामले को सम्मान के साथ देखा जाना चाहिए। इससे इन अफसरों का आत्मविश्वास टूटेगा और इसका असर शासन पर पड़ेगा।
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