कश्मीर में अमन बहाली के लिए नरम नीति की वकालत करने वाले केंद्रीय वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा से इस बार कोई सलाह नहीं ली गई। शर्मा की सलाह पर 10 हजार पत्थरबाजों से मुकदमे की वापसी और एकतरफा सीजफायर जैसे कदम उठाए गए लेकिन गवर्नर शासन पर उनसे राय नहीं ली गई। वार्ताकार फिलहाल कश्मीर में हैं और इसी बीच गवर्नर सासन का निर्णय ले लिया गया। वार्ताकार को अब केंद्र से नए दिशानिर्देश मिल सकते हैं।
पीएमओ राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा है कि देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करने की हमारी नीति सर्वोपरि है। पीडीपी ने कई मौके पर माकूल रिस्पांस नहीं दिया। लिहाजा सख्त फैसला जरूरी हो गया था।
सत्ता छिनने के साथ ही पीडीपी में विभाजन का खतरा बढ़ गया है। पूर्व मंत्री डॉ. हसीब द्राबू और मुजफ्फर हुसैन बेग जैसे दिग्गज महबूबा के खिलाफ हैं। मंत्री पद और सत्ता सुख से वंचित रहे विधायकों की भी बड़ी फौज है। सरकार गिरने के बाद महबूबा के लिए पार्टी में एकजुटता बनाए रखना बडी़ चुनौती होगी।