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घाटी में दहशत पर भारी पड़ा जम्हूरियत का जश्न, कुछ मुंह ढंककर तो कई छिपते छिपाते पहुंचे बूथों तक

Tue, 09 Oct 2018 02:52 AM IST
बृजेश कुमार सिंह, अमर उजाला, जम्मू
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घाटी में जम्हूरियत का जश्न दहशत पर भारी पड़ा। निकाय चुनाव से पहले दो नेकां कार्यकर्ताओं की हत्या, आतंकियों की धमकियों व अलगाववादियों के बहिष्कार से जिस प्रकार भय का माहौल बना था, उसमें कई प्रत्याशियों ने चुनाव से हटने का सोशल मीडिया पर एलान किया। दहशत के इस माहौल को नकारते हुए सोमवार को पहले चरण में मतदाता वोट डालने पहुंचे। कुछ मतदाता मुंह ढंककर बूथों तक पहुंचे तो कई छिपते छिपाते।

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घाटी में दहशत के कारण ही 177 वार्ड के लिए किसी भी प्रत्याशी ने पर्चा नहीं भरा। सोमवार को शुरुआती दौर में मतदान की गति काफी धीमी रही। ऐसे में लगने लगा था कि वोटिंग का आंकड़ा पांच फीसदी तक ही सिमट कर रह जाएगा, लेकिन बाद में बूथों तक मतदाता पहुंचने लगे। उत्तरी कश्मीर के कुछ बूथों पर लाइन भी लगी। श्रीनगर के महताब बाग में सुबह के वक्त बूथ पर केवल चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारी ही थे।

काफी देर तक यहां एक भी वोटर नहीं पहुंचा। यही हालत दक्षिणी कश्मीर के भी कुछ बूथों पर रही। श्रीनगर के हुमहामा, बागे मेहताब, दक्षिणी कश्मीर के कोकरनाग और उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा में मतदान में उत्साह नहीं दिखा। काजीगुंड और अच्छाबल में मतदान नहीं हुआ। कारगिल और लेह में भी लोगों ने बढ़ चढ़कर मतदान में हिस्सा लिया।  
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सज्जाद लोन ने निभाई अहम भूमिका
कश्मीर घाटी में सबसे ज्यादा मतदान उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के कुपवाड़ा और हंदवाड़ा तहसील में दर्ज किया गया। यह इलाका पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेता सज्जाद गनी लोन का गढ़ है, जो पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार में समाज कल्याण मंत्री रहे हैं। माना जा रहा है कि उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए यहां वोटिंग के लिए लोगों को प्रेरित किया।

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