सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (सीएटी), श्रीनगर बेंच ने जम्मू-कश्मीर में छह नायब तहसीलदारों को काल्पनिक सेवा लाभ देने से इनकार करने वाले सरकारी आदेश को रद्द कर दिया है।
ट्रिब्यूनल ने केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन को निर्देश दिया है कि वह लागू कानून और न्यायिक मिसालों के अनुसार उनके मामले पर पुनर्विचार करे। याचिकाकर्ता हमिदुल्लाह डार, अली मोहम्मद भट, इम्तियाज अहमद डार, रईस अहमद पर्रे, मुश्ताक अहमद डार और इफ्तिखार अहमद गट्टू ने याचिका दायर कर नवंबर 2009 से काल्पनिक नियुक्ति और वरिष्ठता की मांग की थी।
न्यायिक सदस्य एमएस लतीफ और प्रशासनिक सदस्य प्रसांत कुमार की पीठ ने पाया कि सरकार समानता के सिद्धांतों को लागू करने में विफल रही और समान स्थिति वाले उम्मीदवारों के बीच भेदभाव किया। आदेश को मनमाना, तर्कहीन और बाध्यकारी न्यायिक मिसालों के विपरीत पाया गया। ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में कहा, कानून स्पष्ट है कि समान स्थिति वाले कर्मचारियों के साथ अलग-अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ताओं को काल्पनिक लाभ से वंचित करना, जबकि दूसरों को यह लाभ देना, संविधान के अनुच्छेद 14 का स्पष्ट उल्लंघन है।” ट्रिब्यूनल ने जम्मू-कश्मीर राजस्व विभाग को छह सप्ताह के भीतर स्टैनजिन रिगडोल और संजय धर मामलों के फैसलों का पालन करते हुए एक नया, तर्कसंगत आदेश पारित करने का निर्देश दिया। साथ ही, याचिकाकर्ताओं की काल्पनिक वरिष्ठता, पेंशन और सेवा लाभ के हक पर विचार करने को कहा।