शुक्रवार को एक ओर जहां प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि मुक्त करवाए गए बच्चों के परिजनों को सूचित करने के साथ ही बच्चों की फोन पर बात भी करवाई जा चुकी है वहीं दूसरी ओर शनिवार दोपहर जिला सचिवालय पहुंचे अभिभावकों ने बताया कि उन्हें कोई जानकारी नहीं मिली थी। जैसी ही पता चला वो सभी अलग अलग जगह से बच्चों को लेने के लिए कठुआ पहुंच गए हैं।
हैरानी की बात थी कि जहां बच्चे लगातार आरोप लगा रहे थे कि पादरी उनसे गंदी हरकतें करता था वहीं अभिभावकों का कहना था कि बच्चों ने उनसे कभी ऐसी शिकायत नहीं की है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को बताया कि उनकी पारिवारिक परिस्थितियों के चलते ही उन्होंने बच्चों को यहां रहने के लिए भेजा था और जो मामला सामने आया है ऐसा नहीं हो सकता है। वो भी बच्चों से बात करना चाहते हैं। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि शायद बच्चों ने दबाव में आकर ब्यान दिए हैं। एडीसी घनश्याम सिंह ने अभिभावकों को कहा कि बच्चों के साथ क्या हो रहा है इसकी उनहें खबर रखनी चाहिए थी।
बच्चे असुरक्षित थे ऐसे में प्रशासन ने कार्रवाई की है। सभी बच्चे सही सलामत और प्रशासन की देखभाल में हैं जिन्हें पुलिस वेरिफिकेशन के बाद अभिभावकों को सौंप दिया जाएगा। इससे पहले शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में एक बच्ची ने बताया था कि पादरी उसे रात के समय अपने कमरे में ले जाकर गंदी हरकतें करता था जिसके बाकायदा उसने शिकायत अपनी मां से भी की थी। बच्ची ने बताया था कि मां ने उसकी बात को अनसुना करते हुए यह जवाब दिया कि वो ऐसे लोग नहीं अच्छे लोग हैं। बच्चों ने मीडिया को यह भी बताया था कि पादरी की पत्नी के जाने के बाद से यह सिलसिला शुरू हुआ था और यदि बच्चे देखते कि बच्ची को कहां ले जाया जा रहा है तो उनकी पिटाई की जाती थी।