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Jammu News: 22 फरवरी को नहीं भूल सकते

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जम्मू। 22 फरवरी का दिन डोगरे कभी भुला नहीं सकते हैं। क्योंकि, इसी दिन से डोगरी की पहचान मिटाने की शुरुआत हुई थी। 1889 में ब्रिटिश दबाव के तहत महाराजा प्रताप सिंह ने एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
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इसमें जम्मू की आधिकारिक अदालत की भाषा के रूप में फ़ारसी के स्थान पर उर्दू को शामिल किया गया। इससे डोगरी भाषा को कामकाज में लाना बंद हुआ था। यह कहना है लेखक सौरव सिंह सरमल का। अंतरराष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस पर उन्होंने कहा कि जानबूझकर डोगरी को एक व्यवहार्य अदालती भाषा के रूप में नजरअंदाज कर दिया। ब्यूरो
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