राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) श्रीनगर और बाबुल नोशिरवानी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (बीएनयूटी) ईरान ने सोमवार को सहयोगात्मक, शैक्षणिक, अनुसंधान गतिविधियों और समझ का पता लगाने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। समझौते पर एनआईटी के निदेशक डॉ. राकेश सहगल और चांसलर, बीएनयूटी के कुलपति डॉ. जावेद वसेगी अमीरी ने हस्ताक्षर किए।
बीएनयूटी की स्थापना 1973 में ईरान के सबसे बड़े परोपकारी लोगों में से एक ईरान के एक शहर बाबोल में स्वर्गीय सीसे होसिन फालोहा नोशिरवानी ने की थी। वर्ष 2008 से इसे बाबुल नोशिरवानी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के रूप में जाना जाता है। एनआईटी के निदेशक डॉ. राकेश सहगल ने कहा कि यह वास्तव में बहुत खुशी की बात है क्योंकि ऐतिहासिक एमओयू पर हस्ताक्षर करने के लिए दो तकनीकी संस्थान एक साथ आए हैं।
इस समझौते से छात्रों, संकाय सदस्यों और दोनों संबंधित संस्थानों के अन्य सदस्यों को इसका लाभ मिलेगा। यह हमें तकनीकी आयामों के माध्यम से मानवता की सेवा करने में मदद करेगा। इस समझौते से एनआईटी श्रीनगर और बीएनयूटी ईरान के बीच शैक्षिक साझेदारी और फलदायी अनुसंधान सहयोग को प्रोत्साहित करेगा। हम संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं और संकाय विनिमय कार्यक्रमों पर भविष्य में मिलकर काम करेंगे।
इस अवसर पर बीएनयूटी ईरान के चांसलर डॉ. जावेद वसेगी अमीरी ने कहा कि दोनों संस्थानों के संकाय भी शोध परियोजना प्रस्तावों, छात्रों के परस्पर आदान-प्रदान और पारस्परिक हित के विषयों में संयुक्त अनुसंधान में सहयोग करेंगे। मैं इस समझौते से बेहद खुश हूं।
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