पिछले साल केरल में हुई नेशनल गेम्स के पदक विजेताओं को जम्मू-कश्मीर ओलंपिक एसोसिएशन की ओर से आगामी पांच जून को सम्मानित किया जाएगा। इसमें पदक विजेताओं में स्वर्ण, रजत और कांस्य के लिए 21000, 15000 और 11000 रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। एसोसिएशन के महासचिव आशुतोष शर्मा ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि पदक विजेताओं को प्रोत्साहित करने के लिए यह फैसला लिया है।
केरल में हुई नेशनल गेम्स में राज्य ने पंद्रह पदक अपने नाम किए थे। इसमें जिमनास्टिक में दो स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य, फेंसिंग में दो कांस्य, बाक्सिंग में तीन कांस्य, वुशू में एक स्वर्ण, एक रजत, दो कांस्य और वाटर स्पोर्ट्स में एक कांस्य पदक हासिल हुआ।
वर्ष 2011 में हुई नेशनल गेम्स के मुकाबले केरल में राज्य की झोली में तीन पदकों की बढ़ोतरी हुई थी। हालांकि प्रोत्साहन के मुकाबले में राज्य के धुरंधर अन्य राज्यों से पिछड़े हुए हैं। सम्मान समारोह में उपमुख्यमंत्री डा. निर्मल सिंह, तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री प्रिया सेठी, इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन के महासचिव और उत्तराखंड ओलंपिक एसोसिएशन के प्रधान राजीव मेहता धुरंधरों का हौसला बढ़ाने पहुंचेंगे।
नेशनल गेम्स में हर बार राज्य के धुरंधर अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने में कामयाब रहे हैं, लेकिन प्रोत्साहन के मुकाबले में वे अन्य राज्यों से पिछड़े हुए हैं। दूसरे राज्यों की तुलना में स्थानीय प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक लाने पर सिर्फ कुछ हजार रुपये के पुरस्कार से संतुष्टि करनी पड़ रही है। ढांचे के नाम पर भी खेल क्षेत्र में राज्य काफी पीछे है।
वर्ष 2007 में गुवाहाटी में हुई नेशनल गेम्स में राज्य के पदक विजेताओं को बीस, दस और सात हजार रुपये का पुरस्कार कई महीनों के बाद दिया गया था, लेकिन इसके बाद वर्ष 2011 में रांची में र्हुई नेशनल गेम्स में पूर्व सरकार राज्य के पदक विजेताओं को भूल गई और उन्हें कोई पुरस्कार नहीं दिया गया।
अंतरराष्ट्रीय फेंसर रशीद अहमद का कहना है कि केरल, तमिलनाडु, हरियाणा, मणिपुर आदि राज्यों में स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक विजेताओं को पांच, तीन और दो लाख रुपये का पुरस्कार दिया जा रहा है। इसके अलावा कई अन्य राज्य इस पुरस्कार राशि में और आगे चल रहे हैं। जेएंडके के खिलाड़ियों की भी प्रोत्साहन राशि बढ़ाई जानी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि राज्यपाल ने राष्ट्रीय खेलों में स्वर्ण पदक विजेताओं को 51 हजार, रजत पदक विजेताओं को 31 हजार और कांस्य पदक विजेताओं को 21 हजार रुपये का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की थी। सरकार को नेशनल पदक विजेताओं को पांच, तीन और दो लाख रुपये के पुरस्कार का प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन कुछ खास नहीं हो पाया है।