विश्वविद्यालयों और कालेजों में नया सेशन शुरू होने के साथ रैगिंग को लेकर खास सतर्कता बरती जा रही है। फ्रेशर का स्वागत करने के साथ सीनियर को रैगिंग को लेकर हिदायतें जारी की गई हैं।
रैगिंग पर नजर रखने और सख्ती के लिए शैक्षणिक संस्थानों में विभिन्न एंटी रैगिंग कमेटियों का गठन किया गया है। इसके लिए विवि और कालेजों में कुछ खास स्थानों की शिनाख्त की गई है, यहां रैगिंग के मामलों की आशंका हो सकती है। ऐसे स्थानों पर नजर रखी जा रही है।
हालांकि पिछले कुछ साल में शहर के उच्च शैक्षणिक संस्थानों में रैगिंग को लेकर गंभीर मामले सामने नहीं आए हैं। सेंट्रल यूनिवर्सिटी के अकादमिक कोआर्डिनेटर प्रो. लोकेश वर्मा के अनुसार रैगिंग के मामलों से निपटने के लिए सभी तैयारियां की गई हैं।
विश्वविद्यालयों और कालेजों में यूजी और पीजी कोर्सों के लिए नया सेशन लगभग शुरू हो गया है। इसके अलावा विभिन्न सेमेस्टरों के लिए दाखिले जारी हैं। पिछले कुछ समय से रैगिंग को लेकर सीनियर
विद्यार्थियों में नजरिया भी बदला है। अब उच्च शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थी पढ़ाई की तरफ ध्यान देकर कॅरियर पर सारा ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
रैगिंग के खिलाफ जागरूकता के लिए दाखिले के दौरान विद्यार्थियों को पंपलेट और प्रोस्पेक्टस में महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई हैं। जम्मू विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के लिए रैगिंग की शिकायत करने के लिए यूजीसी के मानदंडों के तहत आनलाइन सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा क्राइम ब्रांच और पुलिस विभाग के सिक्योरिटी विंग से मिलने वाली रिपोर्ट को भी गंभीरता से लिया जाता है।
उल्लेखनीय है कि जम्मू विश्वविद्यालय में वर्ष 2013 में लॉ विभाग से रैगिंग की एक शिकायत पर दोषी विद्यार्थी को तीन दिन निलंबित किया गया था। आनलाइन में मेडिकल कालेज जम्मू से एक शिकायत मिली थी, लेकिन जांच में वह गलत साबित हुई।