सीमा के पास भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने शनिवार सुबह उड़ान भरी। 20 दिन पूर्व चीनी सुरक्षा बलों ने लिपुलेख में बनी भारतीय टिन शेड को हटाने की चेतावनी लिखा बैनर लहराया था।
उसके बाद से ही आईटीबीपी और सेना ने नाभीढ़ाग से लिपुलेख तक गश्त तेज कर दी थी। सेना को सपोर्ट देने के लिए शनिवार सुबह 8.55 से 9.15 तक फाइटर जेट भी उड़ते नजर आए।
इसके अलावा, सीमा पर तनाव को देखते हुए छुट्टी पर घर पहुंचे भारतीय सेना के जवानों और अधिकारियों की छुट्टियां भी रद्द कर दी गईं हैं। सभी को जल्दी से जल्द अपने अपने बटालियनों में उपस्थिति देने के आदेश दिए गए हैं।
चमोलीः सेना व आईटीबीपी ने जायजा लिया
जोशीमठ स्थित सेना के ब्रिगेड हेडक्वार्टर में सेना की बैठक में चमोली जिले से लगी सीमा पर जारी गतिविधियों की जानकारी ली गई। सेना व आईटीबीपी के अधिकारियों ने सीमा पर स्थिति का जायजा
लिया। सूत्रों के अनुसार शनिवार को जोशीमठ स्थित सेना के हेलिपैड पर दो चेतक हेलिकॉप्टर उतरे। सीमा पर सेनाओं की अलर्टनेस बढ़ गई है। सीमा पर प्राइवेट ट्रकों से भी जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है।
लद्दाख: बढ़ता जा रहा सैन्य जमावड़ा
सरहदी इलाकों में सेना का जमावड़ा और तेज हो गया है। शनिवार को भी श्रीनगर से लद्दाख के लिए बड़ी संख्या में सैन्य वाहनों को भेजा गया। अग्रिम इलाकों में सेना को छोड़ अन्य किसी को भी जाने की अनुमति नहीं दी जा रही। श्रीनगर-लेह नेशनल हाईवे पर सैन्य वाहनों के काफिले देखकर लोग भी शंकाओं में हैं।
गिलगित बाल्टिस्तान के राजनीतिक कार्यकर्ता और इंस्टीट्यूट ऑफ गिलगित बाल्टिस्तान स्टडीज के निदेशक सेंगे एच सेरिंग ने कहा कि लद्दाख में भारत के बुनियादी ढांचा निर्माण से चीन डरता है।
इसलिए वह भारत को धमकाने की कोशिश कर रहा है। इंस्टीट्यूट ऑफ गिलगित सेरिंग ने कहा, भारत बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है और काराकोरम पास तक पहुंच को और आसान बना रहा है।
इसके जरिये अब भारत गलवां घाटी से चीन के राष्ट्रीय राजमार्ग जी 219 तक पहुंच सकता है। ऐसे में अगर भारत पूर्व और उत्तर की ओर बढ़ता है तो वह तिब्बत को जिनजियांग से काट सकता है। साथ ही साथ व पूर्वी रूट को भी काट सकता है, जोकि सीपेक का दूसरा रास्ता है।