फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सब्जियों की बिक्री नहीं होने से बढ़ रही किसानों की परेशानी

विज्ञापन
विज्ञापन
आरएस पुरा। किसान मुनाफा कमाने के लिए हरी सब्जियों की खेती करते हैं। लेकिन कोरोना के के कारण तीन सप्ताह से लॉकडाउन के चलते कम कीमत मिल रही है। इस लॉकडाउन में जहां किसानों की सब्जियों की बिक्री उचित दामों पर नहीं हो रही है। किसानों को मजबूरी में मंडी में हरी सब्जियों को औने-पौने दामों में बेचने पर मजबूर होना पड़ रहा है। इससे किसानों के सामने भुखमरी और कर्ज की समस्या खड़ी होने पर चिंता बनी हुई है।
विज्ञापन

आरएस पुरा में कई गांव में किसान सब्जियां लगाते हैं। इस बार कोरोना के चलते दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किसान प्रीतम लाल का कहना है कि इन दिनों पहले वह सब्जियां बेच काफी मुनाफा प्राप्त करते थे। इस बार किया खर्च भी नहीं निकाल पाए। उन्होंने कहा कि कोरोना के कारण हालात यह हो गए हैं कि जिन हरी सब्जियों की कीमत कभी कम नहीं होती थी, आज वही 5-10 रुपये किलो बिक रही है। किसान मोहन लाल का कहना है कि उनके गांव कत्याल में खरबूजे की अच्छी पैदावार होती है। इसका भाव बेहतर मिलता था। इस बार ऐसा नहीं हो पाया। अब बारिश होने पर खरबूूजा व तरबूूज की गुणवत्ता बेेहतर नहीं रही। अब इसकी बिक्री नहीं होने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। भिंडी, टमाटर, करेला, कद्दू इन सब्जियों के दाम आसमान छूते थे। आज स्थिति यह हो गई है कि ये सब्जियां औने पौने दामों पर बेचे जा रहे हैं।
सब्जियां पहले अब
खीरा 20 से 25 प्रति किलो 5 से 8 रुपये प्रति किलो
भिंडी 15 से 20 रुपये किलो 5 रुपये किलो
कद्दू 20 रुपये प्रति किलो 5 से 8 रुपये प्रतिकिलो
करेला 25 रुपये किलो 8 से 10 रुपये किलो
टमाटर 10-15 रुपये किलो 5 से 7 रुपये प्रतिकिलो
सब्जियों के इन दामों से अनुमान लगा सकते हैं कि सब्जी किसानों को इनसे मुनाफा तो दूर उनकी लागत तक नहीं निकल रही है। ऐसे में किसानों के सामने भुखमरी की नौबत उत्पन्न हो गई है।
विज्ञापन

किसानों को रहा घाटा, मुनाफा कमा रहे व्यापारी
बातचीत के दौरान किसान धर्मपाल का कहना है कि टमाटर खेतों में सड़ रहे हैं। धनीराम के अनुसार लॉकडाउन के दौरान लोगों ने घर से निकलना बंद कर दिया। मंडी की सब्जी और कस्बो में ठेले पर मिलने वाली सब्जी में जमीन आसमान का अंतर रहा। मंडी में जहां करेला 5 से 8 रुपये किलो बिक रहे हैं, वहीं घर-घर जाकर कर ठेले पर बेचने वाले 10 से 15 रुपये किलो बेच रहे हैं। योगराज का कहना है कि इस बार तरबूज व खरबूजा 10 रुपये किलो रहा, जिससे खर्च भी पूरा नहीं हो पाया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें