- पहली खेप के बाद सेब, नाशपाती, आड़ू और खुबानी के निर्यात की तैयारी
- बेहतर दाम मिलने की उम्मीद से बागवानों और कारोबारियों में बढ़ा उत्साह
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। प्रदेश में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की प्रीमियम अरेको चेरी और सेंटरोज प्लम की पहली खेप भेजे जाने के साथ प्रदेश के बागवानी क्षेत्र के लिए नए अवसर खुल गए हैं। पहली खेप की सफलता के बाद अब सेब, नाशपाती, आड़ू, खुबानी समेत अन्य उच्च गुणवत्ता वाले फलों को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की तैयारी शुरू हो गई है। एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (एपीडा) का मानना है कि इससे प्रदेश के कृषि निर्यात को नई गति मिलेगी और बागवानों को बेहतर कीमत मिलने का रास्ता खुलेगा।
प्रदेश में करीब सात लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बागवानी होती है। हर वर्ष लगभग 25 लाख मीट्रिक टन फलों का उत्पादन होता है। सेब सबसे बड़ा बागवानी उत्पाद है। अखरोट, चेरी, प्लम, नाशपाती, आड़ू, खुबानी, बादाम और केसर का भी बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। इसके बावजूद लंबे समय तक इन फलों का अधिकांश कारोबार घरेलू बाजार तक ही सीमित रहा क्योंकि जल्दी खराब होने वाले फलों के लिए आधुनिक पैकिंग, कोल्ड चेन और तेज परिवहन की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी।
सेब से आगे बढ़ेगा फल निर्यात, गुणवत्ता सुधारने पर काम शुरू
एपीडा के अध्यक्ष अभिषेक देव ने कहा कि अब तक प्रदेश की पहचान मुख्य रूप से सेब, अखरोट और केसर के निर्यात के लिए रही है। एपीडा ने जम्मू-कश्मीर के कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सेब, चेरी, अखरोट, शहद, बासमती चावल और गुच्छी को प्रमुख निर्यात उत्पादों के रूप में चिन्हित किया है। विदेशी खरीदारों की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने पर दूसरे फलों का निर्यात भी चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जाएगा। प्रीमियम बागवानी उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी संभावनाएं हैं। संस्था किसानों को गुणवत्ता मानकों, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और विपणन से जोड़ने के साथ नए विदेशी खरीदार उपलब्ध कराने पर काम कर रही है।
बेहतर दाम मिलने से बढ़ी निर्यातकों की उम्मीद
पहली खेप में शामिल किसानों को चेरी पर घरेलू बाजार की तुलना में करीब 60 प्रतिशत और प्लम पर लगभग 120 प्रतिशत तक अधिक कीमत मिलेंगी। इससे प्रदेश के अन्य बागवानों का भी निर्यात योग्य गुणवत्ता वाले उत्पादन की ओर रुझान बढ़ने की उम्मीद है। जम्मू के फल कारोबारी रोहन जैन ने बताया कि विदेशों में अच्छी गुणवत्ता वाले फलों की लगातार मांग रहती है। यदि नियमित रूप से निर्यात शुरू होता है तो किसानों को स्थानीय मंडियों की तुलना में बेहतर दाम मिलेंगे और बागवानी कारोबार का दायरा भी बढ़ेगा। श्रीनगर के फल निर्यातक मोहम्मद रमजान के अनुसार पहले सबसे बड़ी चुनौती कम समय में ताजा फल विदेशी बाजार तक पहुंचाना था। अब पैक हाउस, कोल्ड चेन और बेहतर लॉजिस्टिक सुविधाएं विकसित होने से यह काम आसान हो रहा है।