- अमेरिका में टैरिफ लगने से प्रदेश के निर्यात पर भी पड़ सकता है असर
- विशेषज्ञ बोले - घबराने की जरूरत नहीं, विकल्प मिलेंगे, सरकार की नीति का इंतजार करें
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रप की ओर से भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा ने जम्मू-कश्मीर के निर्यात कारोबार को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर कश्मीर से अमेरिका को भेजे जाने वाले केसर, ड्राई फ्रूट पश्मीना शॉल और हैंडलूम-हैंडीक्राफ्ट जैसे उत्पाद इस फैसले से सीधे प्रभावित हो सकते हैं।
व्यापारियों और विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में इन उत्पादों की कीमतें बढ़ जाएंगी। इससे उनकी मांग घट सकती है। हालांकि, उम्मीद की जा रही है कि भारत सरकार वैकल्पिक बाजारों पर काम करेगी और निर्यात को नया रास्ता मिलेगा।
पश्मीना, केसर और सूखे मेवों की मांग पर संकट
कश्मीर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन जाविद अहमद टेंगा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से अमेरिका को बड़ी मात्रा में पश्मीना शॉल, केसर, अखरोट, ड्राई फ्रूट, हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट उत्पादों का निर्यात होता है। टैरिफ लागू होने से अमेरिकी बाजार महंगा हो जाएगा और वहां हमारे उत्पादों की मांग में गिरावट आ सकती है। अगर अमेरिका में माल नहीं गया तो किसी और देश में जाएगा। हमारे उत्पादों की दुनिया में मांग है और नए रास्ते जरूर निकलेंगे।
घबराने की नहीं, समझदारी की जरूरत
नेशनल ट्रेड वेलफेयर बोर्ड के सदस्य संजय बंसल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर इस फैसले से अछूता नहीं रहेगा। अमेरिका एक बड़ा बाजार है, असर तो पड़ेगा ही, लेकिन सरकार जल्द ही ऐसे देशों की ओर रुख करेगी, जहां हमारे उत्पादों की मांग है। यूरोप, खाड़ी देश और दक्षिण एशिया जैसे क्षेत्रों में बाजार बढ़ाया जा सकता है। हाल ही में यूके से हुआ व्यापारिक समझौता भी जम्मू-कश्मीर के उत्पादों के लिए नए रास्ते खोलेगा। घबराने की बजाय रणनीति के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है।
सरकार के रुख का करें इंतजार
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की जम्मू-कश्मीर शाखा के अध्यक्ष सीए सौरव परगाल ने कहा कि अभी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। अमेरिका की ओर से केवल घोषणा हुई है, कोई आधिकारिक दस्तावेज जारी नहीं हुआ है। सरकार की प्रतिक्रिया और अगला कदम क्या होगा, इस पर नजर रखनी चाहिए। फिलहाल निर्यातकों को जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहिए। उम्मीद है कि सरकार जरूरी कदम उठाएगी ताकि निर्यातक और कारीगरों को राहत मिल सके।