- जम्मू में चांदी 1.18 लाख रुपये प्रति किलो पर पहुंची
- यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर, बिक्री में 80 फीसदी तक गिरावट
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू समेत देशभर के सर्राफा बाजारों में चांदी ने नया रिकार्ड बना दिया है। सोमवार को जम्मू में चांदी का भाव 1.18 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। भावों में आई इस तेजी से बाजार में हड़कंप है। चांदी को अब तक आम आदमी की पहुंच में माना जाता था, लेकिन अब यह भी धीरे-धीरे अमीरों की चीज बनती जा रही है।
दुकानदारों का कहना है कि पहले जहां चांदी के बर्तन, सिक्के और गहनों की अच्छी बिक्री होती थी, अब ग्राहक केवल दाम पूछते हैं और लौट जाते हैं।
लखदाता बाजार के सर्राफा व्यापारी अमन गंडोत्रा ने बताया कि चांदी की बिक्री पिछले कुछ महीनों में करीब 80 फीसदी तक घट गई है। पहले हर त्योहार और शादी-ब्याह के मौके पर ग्राहकों की भीड़ रहती थी। अब तो भाव सुनते ही लोग दुकान से पलट जाते हैं। इससे ग्राहकों की परेशानी तो बढ़ी ही है, हम व्यापारियों के लिए भी चिंता की बात है।
व्यापारियों के लिए भी घाटे का सौदा बनी चांदी
स्वर्णकार संघ जम्मू के प्रधान अजय वर्मा ने चांदी के दामों में उतार-चढ़ाव को सरकार की नीतियों से जोड़ा। उन्होंने बताया कि जब से भारत सरकार ने धातु को कमोडिटी ट्रेडिंग में शामिल किया है, तब से भाव बहुत अस्थिर हो गए हैं। कई बार व्यापारी ऊंचे दाम पर चांदी खरीद लेते हैं और कुछ ही दिनों में बाजार नीचे आ जाता है, जिससे सीधा घाटा होता है। अब यह धंधा पूरी तरह जोखिम भरा बन गया है। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग और निवेश बढ़ने के कारण आने वाले समय में चांदी के दाम और ऊपर जा सकते हैं।
ग्राहक देख-सुनकर लौट रहे
स्वर्णकार संघ के महासचिव वरुण वर्मा ने बताया कि इस बार शादी-ब्याह और त्योहारों के मौसम में वह भीड़ नहीं दिखी जो पहले रहती थी। पहले लोग चांदी के बर्तन, पायल, कमरबंद जैसी चीजें खरीदते थे। अब लोग केवल देखने आते हैं, भाव पूछते हैं और लौट जाते हैं। खासकर बीते दो महीनों से स्थिति और ज्यादा बिगड़ गई है। यही हाल रहा तो व्यापार करना बहुत मुश्किल हो जाएगा।
साल दर साल कैसे बढ़े चांदी के दाम
साल भाव (रुपये में)
2019 46,000 - 49,000
2020 68,000 - 75,000
2021 65,000 - 70,000
2022 60,000 - 66,000
2023 72,000 - 78,000
2024 85,000 - 95,000
2025(जुलाई तक) 1,10,000 - 1,18,000
स्रोत: इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन