विद्रोहियों को शहीद नहीं कहा जा सकता : सुनील
महाराजा से प्यार करने वालों को अनुच्छेद 370, 35ए का ख्याल क्यों नहीं आया : चौधरी
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। महाराजा हरि सिंह पर सत्ता और विपक्ष में घमासान हो सकता है। भाजपा के 13 जुलाई 1931 में मारे गए लोगों को गद्दार कहने के बाद सियासी सरगर्मियां बढ़ गई हैं। भाजपा ने साफ किया है कि महाराजा के खिलाफ किसी भी तरह के राजद्रोह को शहादत नहीं माना जाएगा। उधर, शहादत दिवस के एजेंडे पर सत्तापक्ष नेकां के साथ विपक्ष में कुछ अन्य सदस्य भी विरोध की तैयारी कर रहे हैं। विधानसभा में बुधवार को हंगामे के बाद भाजपा विधायकों के साथ नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने बैठक कर रणनीति पर चर्चा की।
सुनील शर्मा ने कहा कि आतंकवाद अंतिम सांसों पर है। अलगाववाद और जमात-ए-इस्माली दफन हो चुके हैं। अगर किसी भी प्रकार की किसी को कोई गलतफहमी है तो उसे दूर कर दे। हमारे सुरक्षाकर्मी जम्मू कश्मीर में शांति बहाल करने के लिए बचनबद्ध है। महाराजा की संपत्तियों पर कश्मीरी हुक्मरानों ने मनोरंजन किया है। उन्होंने जेएंडके बैंक, एसएमएचएस अस्पताल, काॅलेज दिए, लेकिन उन्हीं के विद्रोहियों को कश्मीर में शहीद का दर्जा दिया जाता है। भाजपा को अपनी विचारधारा पर गर्व है। महाराजा हरि सिंह अंतिम डोगरा शासक थे, उनके खिलाफ उठी किसी भी आवाज को कभी शहीद नहीं माना जाएगा। उमर अब्दुल्ला के 2010 के कार्यकाल में 125, महबूबा मुफ्ती के 2016 के कार्यकाल में 116 मौतें हुईं, तब ये भी राजद्रोह हुआ था। हम 13 जुलाई को तथाकथित शहादत दिवस को गद्दार मानते हैं।
उधर, उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने कहा कि विधानसभा में विपक्ष में भाजपा की ओर से शहीदों के लिए इस्तेमाल किए गए शब्द गलत है। वे शहीद ही थे जिन्होंने संविधान को मजबूत बनाने, देश को मजबूत बनाने के लिए कुर्बानियां दीं। अगर भाजपा को महाराजा की इतनी ही फिक्र है तो उनके द्वारा स्थापित किए गए 35 ए और अनुच्छेद 370 को क्यों हटाया गया। उस समय उन्हें महाराजा से प्यार याद नहीं आया। जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया गया।