बीएसएनएल के कर्मचारियों ने मंगलवार को अपने तीन दिन के धरने का आगाज किया। सरकार की बीएसएनएल और कर्मी विरोधी नीतियों के खिलाफ कर्मचारी लामबंद हुए। देशभर में बीएसएनएल यूनियनों और एसोसिएशनों की संयुक्त घोषणा पर यह धरना शुरू किया गया है। कर्मियों ने इसे लेकर जोरदार प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। साथ ही चेतावनी भी दी कि यदि तीन दिन के भीतर उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो धरना लंबा भी खिंच सकता है।
कर्मचारियों की मांगों में पिछले कई महीनों से खाली पड़े एमडी, वित्त विंग के अतिरिक्त निदेशक के पदों को भरना, ग्रामीण क्षेत्रों में लैंड लाइन के हुए नुकसान का मुआवजा देने, बेहतर सेवा के लिए ढांचा खरीदने, कर्मचारियों की पेंशन को रिव्यू करने, बीएसएनएल और एमटीएनएल के मर्ज होने के प्रस्ताव को वापस लेने, बेसिक सैलरी पर पेंशन देने, बीएसएनएल के 1.2 एमएचजेड स्पेक्ट्रम को को ट्राई को सरेंडर करने के प्रस्ताव को वापस लेना आदि शामिल हैं।
इस मौके पर कर्मचारी संगठन नेता एन एस मन्हास, पी के बाली, अनिल शर्मा, रमेश चंद्र, अमरीक सिंह, मंजीत सिंह, रायसिंह, जीतन सिंह, एम के कौल आदि उपस्थित थे। कर्मचारियों ने घोषणा करते हुए 25 फरवरी को नई दिल्ली में संसद के समक्ष धरना देने और 17 मार्च से इन मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी।
कर्मचारियों ने अधिकारियों की पोल खोलते हुए कहा कि विभाग के अधिकारी और सरकार बीएसएनएल के बुनियादी ढांचे को मजबूत नहीं करना चाहती। इसकी वजह से उपभोक्ताओं को परेशान होना पड़ रहा है।