क्रायोस्फेरिक विज्ञान में अनुसंधान क्षमताओं को मज़बूत करने और जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों से निपटने के लिए कश्मीर विश्वविद्यालय (केयू) में पश्चिमी हिमालय में ग्लेशियल अध्ययन के लिए तीन सप्ताहीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम गुरुवार को शुरू हुआ। भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के तहत समर्थित इस पहल का उद्देश्य हिमालयी क्रायोस्फेरिक परिवर्तनों पर विशेष ध्यान देते हुए, ग्लेशियोलॉजी के सैद्धांतिक और व्यावहारिक पहलुओं में शुरुआती करियर वाले शोधकर्ताओं को प्रशिक्षित करना है। यह कार्यक्रम एक तीन-वर्षीय राष्ट्रीय परियोजना (2023-2026) का हिस्सा है, जो अनुसंधान विधियों, उपकरणों और क्षेत्र अध्ययनों में गहन प्रशिक्षण प्रदान करता है।
उद्घाटन करते हुए इस्लामिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आईयूएसटी) के कुलपति एवं समर स्कूल के समन्वयक प्रो. शकील ए रोमशू ने कहा कि भारत की खाद्य, जल और ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने के लिए हिमालयी क्रायोस्फीयर अत्यंत महत्वपूर्ण है। जलवायु परिवर्तन के तीव्र गति से बढ़ने के मद्देनजर हिमालय में क्रायोस्फीयर विज्ञान और निगरानी को तत्काल मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने केयू में ग्लेशियर अनुसंधान के विकास और ग्लेशियोलॉजी में मानव संसाधन विकसित करने की आवश्यकता पर भी विस्तार से चर्चा की।
केयू की कुलपति प्रो. नीलोफर खान ने कह कि तेज़ी से बढ़ते जलवायु परिवर्तन के मद्देनज़र इस क्षेत्र के नाज़ुक हिमनद पारिस्थितिकी तंत्रों को तत्काल वैज्ञानिक ध्यान और सूचित प्रबंधन की आवश्यकता है। हिमनद विज्ञान पर इस तरह के कार्यक्रम हमारे युवा शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं को हिमनदों के पीछे हटने के प्रभावों की निगरानी, समझ और नियंत्रण के लिए आवश्यक उपकरण, ज्ञान और सहयोगात्मक ढांचे से लैस करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
केयू के अनुसंधान डीन प्रो. मोहम्मद सुल्तान भट ने कहा कि ऐसे समय में जब हमारे ग्लेशियर अभूतपूर्व परिवर्तनों से गुजर रहे हैं, युवा वैज्ञानिकों को ऐसे उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल होते देखना उत्साहजनक है। रजिस्ट्रार, प्रो. नसीर इकबाल ने कहा कि हिमालय की हिमनद प्रणालियां दक्षिण एशिया की पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। केयू के भू-सूचना विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. मोहम्मद फारूक मीर ने हिमनद विज्ञान में गहन क्षेत्रीय और प्रयोगशाला प्रशिक्षण के महत्व पर ज़ोर दिया। इस दौरान डॉ. खालिद उमर मुर्तज़ा और डॉ. रियाज़ अहमद डार ने भी विचार व्यक्त किया।