पाकिस्तानी गोलाबारी थमने के बाद शुक्रवार को शिविरों में रह रहे सीमावर्ती ग्रामीणों ने अपने-अपने घरों की ओर रुख किया। रिश्तेदारों के यहां पनाह लेने वाले भी घर पहुंचने लगे हैं। वहीं शिविरों से लौटते लोगों ने सेना की व्यवस्था को सराहा है।
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उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी रेंजरों को करारा जवाब देने के साथ आर्मी ने सीमांत गांवों के लोगों का भी ख्याल रखा। हरसंभव मदद की। यहां तक की जरूरत की चीजों को भी कम कीमत पर उपलब्ध कराया। ऐसी जिम्मेदारी सेना ही निभा सकती है।
कुल मिलाकर सीमावर्ती गांवों में जिंदगी पटरी पर लौटने लगी है। करीब एक हफ्ता पहले पाक गोलाबारी के चलते सीमांत गांवों को खाली करवा कर लोगों को शिविरों में भेजा गया था।
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हलका चंगिया, तरेबा व जब्बोआल से स्लैड़ में भेजा गया था, जबकि पिंडी चाढ़का कला, पिंडी कैंप, कठार व जोइयां आदि गांवों के लोगों को रेहाल में भेजा गया था। सभी ग्रामीण सरकारी आदेश पर शुक्रवार को अपने घरों में लौट आए।
परिवार के साथ फसल की सता रही थी चिंता
सीमा पर पाक गोलाबारी थमने से सीमावर्ती ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। गोलाबारी होने से स्थानीय लोगों को खेतीबाड़ी के साथ परिवार की चिंता सता रही थी। वह शिविरों और संबंधियों के यहां पनाह लेने के लिए मजबूर थे।
पिछले साल गोलाबारी की मार झेल चुके सुचेतपुर की कुंती देवी, विमला देवी, गारू राम, प्रकाशो देवी ने बताया कि सीमा पर माहौल खराब होने से सभी दहशत में थे। परिवार के सदस्यों को परिचितों और संबंधियों के यहां भेज दिया था।
उन्होंने बताया कि गत वर्ष भी पाक रेंजरों ने गांव को निशाना बनाया था। गोलाबारी से अब तक हमने काफी कुछ नुकसान झेला है। फायरिंग रुकने से राहत मिली है। हालांकि पाकिस्तान पर भरोसा नहीं कर सकते हैं। वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आ सकता।
इसलिए यहां हर वक्त खतरा रहता है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती गांव चचवाल, जहां पाक रेजरों की सहायता से पांच सौ मीटर लंबी सुरंग बनाई गई थी, तब पाक रेंजर इसी गांव को निशाना बनाते थे।
मुसीबत की घड़ी में मजाक उड़ा रही सरकार
शिविरों में रह रहे लोगों को शुक्रवार को वापस गांवों में जाने के लिए प्रशासन द्वारा कहने पर लोगों ने राज्य सरकार को जमकर कोसा। लोगों का कहना था कि मुसीबत के समय सरकार सीमावर्ती ग्रामीणों का मजाक उड़ा रही है।
गुज्जर समुदाय के लियाकत अली, मौलवी रौशनदीन, अल्लावक्ष, मंजूर हुसैन का कहना है कि राज्य सरकार मुसीबत की घड़ी में साथ के बजाय लोगों को उनकी हाल पर छोड़ रही है।
शिविरों से गांवों में जाने के लिए कहा जा रहा, जबकि गोलाबारी बंद हुए अभी चंद दिन हुए हैं। अभी लोगों के अंदर से गोलाबारी का डर गया नहीं है। सीमा पार से नापाक हरकत बंद है, लेकिन दहशत कायम है।
गोलाबारी के समय मुश्किल से जान बचाकर सभी शिविरों तक पहुंचे थे। राज्य सरकार शिविरों में लोगों को न तो खाना मुहैया करवाती है न ही दूसरी सुविधाएं। इसके बाद भी लोगों को वापस भेजा जा रहा।
शिविरों से सेना की वापसी और वहां रह रहे लोगों को वापस गांवों में जाने के लिए कहने पर शुक्रवार को उनके सब्र का बांध टूट गया। लोगों का कहना है कि अभी हालात पूरी तरह ठीक नहीं है। इसके बावजूद शिविरों से घर जाने के लिए कहा जा रहा है।
शिविरों में मौजूद गांव रायपुर के देशराज, हंसराज, गांव बेगा की महिला शीला देवी, कृष्णा, ओम प्रकाश, अब्दुल्लिया गांव की जसो देवी, करतार चंद, बस्ती गुलाबगढ़ के महेशपाल, बोध राज का कहना था कि सीमा पर आज भी स्थिति सामान्य नहीं है।
शिविरों से सेना को भी वापस भेज दिया गया है। इस दौरान गुस्साए विस्थापितों ने राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने कहा कि सीमा पर जब तक हालत ठीक नहीं हो जाते, लोगों को शिविरों में रखने के साथ सेना की सेवा जारी रखी जाए।