पहलगाम हमले के बाद जम्मू के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोग विशेष सतर्कता बरत रहे हैं। अरनिया, पुंछ, सांबा, हीरापुर ज्योड़ियां, आरएसपुरा समेत सीमा से सटे लगभग सभी गांवों में विशेष प्रकार की हलचल भी है। कोई रिश्तेदारों के घर में सुरक्षित ठौर तलाश रहा है, तो कहीं कुछ लोगो दिन भर के काम निपटाकर रात बंकर में बिताना शुरू कर चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हमारा इलाका तो फायरिंग, मोर्टार शेल के हमले झेलने का आदी हो चुका है। मगर, सतर्कता तो जरूरी है।
हीरानगर : बंकरों में रोटी-पानी की व्यवस्था
हीरानगर सेक्टर में फिलहाल माहौल शांतिपूर्ण है, लेकिन लोगों में डर है कि कभी भी पाकिस्तान गोलीबारी कर सकता है। लोगों ने घरों में बने बंकरों को पूरी तरह से साफ कर लिया है और हवा, पानी, रोटी बनाने की व्यवस्था भी कर ली है। िदन में तो लोग रोजमर्रा के काम खुले में निपटा रहे हैं, लेकिन रात इन्ही बंकरों में गुजार रहे हैं। प्रदीप कुमार, गोपाल दास, बोध राज कहते हैं कि भगवान से यही प्रार्थना है कि फिर से ऐसे हालात न बनें कि पूरा दिन बंकरों में गुजरना पड़े।
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आरएसपुरा : पूरा ध्यान फसल को घर पहुंचाने पर
आरएसपुरा सीमांत गांव बासपुर के बुजुर्ग ओम प्रकाश का कहना है कि विभाजन के बाद पाकिस्तान ने जख्म देने के सिवाए कुछ नहीं किया। एक बार फिर हमारी सीमाएं तनाव में हैं। सीमावर्ती लोगों का जीवन खेती-बाड़ी और पशुपालन पर निर्भर करता है। हम सब इस वक्त पूरा समय फसलों को काटकर अनाज घरों में इकट्ठा करने में जुटे हैं।
सांबा : इतनी तेजी...बस 10 फीसदी कटाई रह गई बाकी
सांबा में किसान सोहन सिंह, हरी सिंह,गोपाल दास,सोम राज के अनुसार कि अधिकतर किसानों ने सीमा रेखा के निकट से अपनी गेहूं की फसल की कटाई कर ली है। एक दो दिनों में कटाई पूरी कर ली जाएगी।
ज्योड़ियां : प्रशासन की बैठकों का दौर जारी