छंब ज्यौड़ियां। भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित छंब सेक्टर एक बार फिर रणनीतिक चर्चाओं में है। बड़ा सवाल यह है कि पाकिस्तान इस क्षेत्र से भारत पर सीधा हमला करने से क्यों डरता है।
विश्लेषकों की मानें तो इसका जवाब 1965 और 1971 के युद्धों में छिपा है। जब पाकिस्तान ने अस्थायी रूप से इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था लेकिन अब उसे भारी सैन्य व राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी। चूंकि यह क्षेत्र नियंत्रण रेखा पर स्थित एक संवेदनशील ''कच्चा बॉर्डर'' माना जाता है, जहां सीधा हमला पाकिस्तान के लिए आत्मघाती कदम हो सकता है। जानकारों का मानना है कि अगर आज पाकिस्तान इस दिशा से कोई दुस्साहस करता है तो भारतीय सेना न केवल उसका छंब से नियंत्रण समाप्त करेगी, बल्कि लाहौर तक भी कदम बढ़ा सकती है।
छंब वासियों की चेतावनी
स्थानीय नागरिकों में भी देशभक्ति की भावना उच्च स्तर पर है। उनका स्पष्ट मानना है कि अगर पाकिस्तान ने कोई नापाक हरकत की तो छंब वासी स्वयं मोर्चा संभाल लेंगे और उसका मुंहतोड़ जवाब देंगे।
कृषि और सैन्य दोनों में अहम
छंब क्षेत्र केवल सामरिक दृष्टि से नहीं, बल्कि कृषि उत्पादन के लिहाज़ से भी बेहद महत्वपूर्ण है। यहां की उपजाऊ ज़मीन और संसाधनों के कारण यह जम्मू-कश्मीर का एक प्रमुख कृषि क्षेत्र माना जाता है। छंब क्षेत्र के मनावर गांव में जन्मे डॉ. इंदु भूषण बाली बताते हैं कि छंब की मिट्टी में अत्यधिक उत्पादन क्षमता है और यहां के लोग भी राष्ट्रसेवा में अग्रणी हैं। वहीं बहादुर सिंह और शिव राम ने बताया कि छंब सेक्टर केवल एक भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि भारत की सैन्य शक्ति, कृषि समृद्धि और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है। पाकिस्तान की हिचकिचाहट और भारतीय नागरिकों की राष्ट्रसेवा की भावना इस क्षेत्र को एक प्रेरणास्रोत बनाती है। यह एक ऐसा उदाहरण, जो आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति और बलिदान का संदेश देता रहेगा।