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सरहदी लोगों ने बातचीत का किया स्वागत

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परगवाल। सीमा पर संघर्ष विराम का उल्लंघन नहीं करने को लेकर भारत और पाकिस्तान में बनी सहमति पर सीमा क्षेत्र परगवाल के ग्रामीणों ने खुशी जताई है। लोगों का कहना है कि गोलाबारी न होने से अब अपने खेतों में बिना डर के काम कर सकेंगे। सीमा पर रहकर भी खुशहाल जिंदगी जिएंगे। हालांकि कुछ लोगों की राय इनसे बिल्कुल विपरीत है उनका कहना है कि पाकिस्तान पर कभी भरोसा नहीं किया जा सकता। क्योंकि उसकी करनी और कथनी में बहुत अंतर है।
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ज्ञात रहे परगवाल क्षेत्र भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटा है। इसके एक तरफ दरिया चिनाब और दो तरफ पाकिस्तान के साथ लगती सीमा है और यहां के ज्यादातर लोग कृषि पर निर्भर हैं। दूसरी तरफ यहां के ज्यादातर युवा सेना में सेवा दे रहे हैं। इसलिए यहां भारत-पाकिस्तान के बीच में होने वाली फायरिंग में लोगों को काफी परेशानियों के साथ-साथ सेना में सेवा दे रहे बच्चों की भी चिंता सताती है। इस कारण भारत-पाक के बीच संघर्ष विराम का ज्यादातर लोगों ने स्वागत किया है।
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इस बातचीत का स्वागत है। दोनों देशों के बीच गोलाबारी रुकनी चाहिए, जिससे वह खेतों में बेझिझक काम कर सकें, लेकिन क्या पाकिस्तान इस फैसले पर कायम रह पाएगा।
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-मदन सिंह (पूर्व सैनिक), निवासी गांव जट्टे दे कोठे
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ज्यादातर कृषि योग्य जमीन भारत-पाक सीमा से सटी है। जान हथेली पर रखकर खेती करना पड़ती थी। उसी को देखते हुए भारत-पाकिस्तान की बातचीत का स्वागत है।
-सुभाष चंद्र, गांव जमना वेला
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दोनो बेटे सेना में हैं। भारत-पाक के डीजीएमओ के बीच हुई बातचीत, जिसमें दोनों देशों के बीच फायरिंग नहीं करने पर सहमति बनी है। इसका हम स्वागत करते हैं। पाकिस्तान को भी इस मामले में गंभीर होना होगा।
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-गलखवीर सिंह (पूर्व सैनिक), गांव भलवाल मोलू
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