जम्मू-कश्मीर के इकलौते परमवीर चक्र विजेता कैप्टन बाना सिंह कहते हैं कि चीन जानता है कि भारत अब 1962 वाला देश नहीं है। गलवां घाटी के तनाव को युद्ध जैसे हालात की संज्ञा देना सही नहीं होगा। फौज को पता है किस हरकत का कैसे जवाब देना है। सियाचिन में वर्ष 1987 के ऑपरेशन राजीव में अदम्य साहस दिखाकर परमवीर चक्र पदक हासिल करने वाले कैप्टन बाना सिंह ने कहा, ‘मैं व्यक्गित रूप से मानता हूं कि चीन की इस हिमाकत का रणनीतिक रूप से जवाब देना चाहिए। मुझे विश्वास भी है कि भारतीय फौज इसे लेकर पूरी तैयारी कर चुकी है।’
लद्दाखी के नाम पर है गलवां घाटी
भारत और चीन के बीच जिस नदी पर तनाव बना हुआ है, उसका नाम एक लद्दाखी के नाम पर है। गुलाम रसूल गलवां ने वर्ष 1899 में ब्रिटेन के संयुक्त आयुक्त के साथ लेह से ट्रैकिंग कर दुरूह भौगोलिक क्षेत्र में नए रूट तलाशे। इसी दौरान गुलाम रसूल गलवां ने एक नदी की भी खोज की। गुलाम रसूल गलवां को इससे जबरदस्त ख्याति मिली। इसके बाद से नदी का नाम गलवां और क्षेत्र का नाम गलवां घाटी पड़ गया। इतिहास में ऐसा बहुत कम हुआ है, जब किसी नदी का नाम किसी व्यक्ति के नाम से प्रचलित हो।