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अलगाववादियों से वार्ता की सलाह भाजपा को मंजूर नहीं

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जम्मू-कश्मीर में नई सरकार के गठन पर पीडीपी के लिए चुप्पी तोड़ना मजबूरी बन गई थी। मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन के बाद पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने भले ही खामोशी ओढ़ रखी हो लेकिन परदे के पीछे भाजपा और पीडीपी के वार्ताकारों में बातचीत जारी रही।
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पीडीपी गठबंधन एजेंडा के कुछ बिंदुओं पर केंद्र से ठोस आश्वासन पर अड़ा था लेकिन नेशनल कांफ्रेंस के मुखिया फारूक अब्दुल्ला के दांव ने पीडीपी को बैकफुट पर आने को मजबूर कर दिया।

अब दिलों को जोड़ने के मुफ्ती के विजन को पीडीपी ने नए समझौते का आधार बनाया है। इस बीच, केंद्र के दूत वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने महबूबा को कश्मीर के पैकेज के तहत उदार मदद का भरोसा भी दिया है।
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मोदी की लाहौर यात्रा का हवाला देकर पीडीपी को खामोश कर दिया

हालांकि फारूक ने बाद में यूटर्न लेते हुए भाजपा से गठबंधन की संभावना से इनकार कर दिया लेकिन उनके पूर्व के बयान ने भाजपा को बड़ी राहत दी।

भाजपा ने अब साफ कर दिया है कि वर्तमान हालात में अलगाववादियों से बातचीत तो दूर इस मुद्दे पर आश्वासन भी देना उसके लिए संभव नहीं है। यह अलग बात है कि यह मुद्दा गठबंधन एजेंडे में शुमार है।

पाकिस्तान से वार्ता के मुद्दे पर भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लाहौर यात्रा का हवाला देकर पीडीपी को खामोश कर दिया। बाद में पीडीपी की कोर कमेटी की बैठक ने भी मोदी की पहल की सराहना करते हुए नए सिरे से समझौते के लिए मजबूत आधार खोज लिया।
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दोनों पार्ट‌ियों में कई मुद्दों पर गत‌िरोध

यह पहला मौका नहीं है जब नेशनल कांफ्रेंस और भाजपा ने मिलकर सरकार बनाने की कोशिश की हो। चुनाव के तुरंत बाद भाजपा ने पहले नेकां से ही गठबंधन की कोशिश की थी। तब उमर अब्दुल्ला को केंद्र में मंत्री बनाकर जम्मू कश्मीर में भाजपा के मुख्यमंत्री के फार्मूले को उमर ने नकार दिया था।

बाद में दो माह के मंथन से पीडीपी के साथ सरकार बनाने का एजेंडा बना। इस बार पहले भाजपा ने देर की और बाद में पीडीपी ने चुप्पी साधी। मुफ्ती के निधन के दिन ही पीडीपी की ओर से राज्यपाल को पत्र सौंप दिया गया था लेकिन भाजपा ने अपना रुख साफ करने में देर लगाई।

इससे सियासी अनिश्चितता का माहौल पैदा हुआ। इसके बाद परदे के पीछे भाजपा और पीडीपी के बातचीत शुरू हुई जिसमें पीडीपी अलगाववादियों से बातचीत के मुद्दे पर केंद्र की ओर से कोई संकेत चाहती थी। एनएचपीसी के दो प्रोजेक्टों डुलहस्ती और उड़ी की वापसी पर भी केंद्र फिलहाल सहमत नहीं है। इसलिए गतिरोध जारी रहा।

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