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सियासत: गुलाम अली खटाना की नियुक्ति से गुज्जर-बक्करवाल वोट बैंक में सेंधमारी की तैयारी

Sun, 11 Sep 2022 12:31 PM IST
kumar गुलशन कुमार बृजेश कुमार सिंह, जम्मू

सार

प्रदेश में गुज्जर-बक्करवालों की अच्छी उपस्थिति है। कई विधानसभा क्षेत्रों में इनका वर्चस्व है। नेकां और पीडीपी इस समुदाय के वोट बैंक पर अपना हक जताती रही है।
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जम्मू-कश्मीर - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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इंजीनियर गुलाम अली खटाना को राज्यसभा के लिए मनोनीत करने के कई निहितार्थ हैं। इनका प्रभाव गुज्जर-बक्करवाल समुदाय में है। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में पहले विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच उनकी नियुक्ति को गुज्जर-बक्करवाल समुदाय के वोट बैंक में सेंधमारी के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही नेकां और पीडीपी के परंपरागत वोटर माने जाने वाले इस समुदाय को अपने पक्ष में करने की रणनीति माना जा रहा है। 

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प्रदेश में गुज्जर-बक्करवालों की अच्छी उपस्थिति है। कई विधानसभा क्षेत्रों में इनका वर्चस्व है। नेकां और पीडीपी इस समुदाय के वोट बैंक पर अपना हक जताती रही है। राज्य में पहली बार अनुसूचित जनजाति समुदाय के लिए नौ सीटें आरक्षित की गई हैं। अनुसूचित जनजाति संवर्ग में पहाड़ी समुदाय को शामिल करने की चर्चा है, जिसका गुज्जर समुदाय की ओर से विरोध किया जा रहा है। माना जा रहा है कि इस विरोध को थामने की कोशिश के तहत यह मनोनयन किया गया ताकि पहाड़ी समुदाय को एसटी का दर्जा देने की राह आसान हो सके।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजोरी, पुंछ, जम्मू के साथ ही अन्य जिले जहां इनकी जनसंख्या है, वहां पर इस मनोनयन के जरिये इन्हें साधा जा सके। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र रैना का कहना है कि खटाना की नियुक्ति से पार्टी को बल मिलेगा। वे 2008 में तबसे पार्टी में हैं जब कोई मुस्लिम समुदाय का व्यक्ति साथ आने से कतराता था। उन्होंने गुज्जर समुदाय के साथ ही अन्य समुदाय में भी पैठ बढ़ाने में पार्टी की रणनीति का हिस्सा बनकर बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था। वे बिना किसी व्यक्तिगत हित के पार्टी के साथ निस्वार्थ भाव से जुड़े रहे। 
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370 हटने के फायदे भी भुनाएगी

माना जा रहा है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद गुज्जर समुदाय को प्रतिनिधित्व देकर भाजपा यह संदेश देने की कोशिश करेगी कि उसका सबका साथ सबका विकास का नारा खोखला नहीं है। उसकी कथनी व करनी में कोई फर्क नहीं है। वह यह संदेश देने की कोशिश करेगी कि मौका मिलते ही उसने इस समुदाय को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है जो अब तक इस अधिकार से वंचित रहा है। गुज्जर समुदाय के लोग राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग को लेकर आंदोलन करते रहे हैं। 

डेढ़ साल बाद राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर का प्रतिनिधित्व

राज्यसभा में लगभग डेढ़ साल जम्मू-कश्मीर का प्रतिनिधित्व हुआ है। फरवरी 2021 में राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर से रहे चार सांसद कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद, भाजपा के शमशेर सिंह मन्हास, पीडीपी के नजीर अहमद लावे व मीर मोहम्मद फैयाज का कार्यकाल समाप्त हो गया था। विधानसभा न होने के चलते यहां से कोई राज्यसभा में नहीं जा सका। इसके बाद से प्रतिनिधित्व शून्य रहा था।

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