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इस वजह से पीडीपी के समाने झूकी भाजपा

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रियासत में इतिहास रचने की जल्दबाजी में भाजपा को अपने स्थापित सिद्धांतों और नीतियों से समझौता करना पड़ा है। यह सियासी मजबूरी थी। दिल्ली चुनाव के नतीजों ने लचीले रुख की पृष्ठभूमि तैयार की। भाजपा को पहली बार सरकार में शामिल होने का मौका मिला।
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पार्टी इसे किसी कीमत पर गंवाना नहीं चाहती थी। मोदी के मिशन कश्मीर के लिए भाजपा ने सरकार में शामिल होने की नीति पहले ही अख्तियार कर ली थी लेकिन इसके लिए उसे कीमत भी चुकानी पड़ी है।

जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष श्यामा प्रसाद मुखर्जी की शहादत वाले प्रदेश में सरकार बनाना संघ परिवार का सपना रहा है लेकिन दिल्ली चुनाव के नतीजों ने भाजपा से सियासी मोलतोल की क्षमता छीन ली। लिहाजा पीडीपी की शर्तों पर हामी भरने के अलावा कोई विकल्प नहीं रह गया था।
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वैसे नई सरकार से प्रधानमंत्री मोदी की धर्मनिरपेक्ष छवि को निखारने का ऐतिहासिक मौका जरूर मिला है। कभी सियासी अछूत समझी जाने वाली भाजपा को देश के एकमात्र मुस्लिम बहुल राज्य में पीडीपी जैसी कट्टर छवि वाली पार्टी का साथ मिल गया है। भाजपा इसे पूरे देश में भुना सकती है।
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इस वजह से आए थे भाजपा के दिग्गज नेता

जम्मू कश्मीर का मुद्दा केंद्र की हर सरकार के लिए अहम रहा है। मोदी ने मुफ्ती से समझौता कर समस्या के समाधान के प्रयास का संकेत देने की कोशिश की है। यही कारण है कि गठबंधन के एजेंडे को ऐसी अहमियत दी गई जैसे यह ऐतिहासिक समझौता हो।

पूर्व में शेख अब्दुल्ला के साथ जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी के समझौते तथा बाद में फारूक-राजीव गांधी करार के समानान्तर मोदी-मुफ्ती घोषणा पत्र को समस्या हल करने का सार्थक कदम बताया जा रहा है।

समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अलावा लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी की मौजूदगी से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि भाजपा कश्मीर के मुद्दे पर बेहद संवेदनशील है।

आडवाणी ने उप प्रधानमंत्री रहते हुए हुर्रियत से बातचीत की थी और जोशी ने श्रीनगर के लालचौक पर तिरंगा फहराने के लिए अभियान छेड़ा था।
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सरकार में पीडीपी बिग ब्रदर

उपलब्धियां कीमत भी मांगती हैं। लिहाजा इस सरकार में पीडीपी बिग ब्रदर की भूमिका में हैं। पीडीपी के सीएम समेत 14 मंत्री हैं जबकि भाजपा के हिस्से डिप्टी सीएम समेत 11 मंत्री पद आए। इससे पहले राज्यसभा और विधान परिषद के चुनाव में भी भाजपा को कम हिस्से पर संतोष करना पड़ा।

पाकिस्तान और हुर्रियत से बातचीत, क्रास एलओसी ट्रेड का विस्तार, पावर प्रोजेक्टों की वापसी जैसी पीडीपी की तमाम अहम शर्तें सरकार के लिखित एजेंडे में आ गईं हैं। अफस्पा पर पीडीपी थोड़ा झुकी। सीएमपी में कहा गया है कि सरकार इस मुद्दे की जांच कर संबंधित क्षेत्रों से अफस्पा हटाएगी।

बाद में मुफ्ती ने कहा कि सीएम यूनिफाइड कमांड के चेयरमैन होते हैं और वह इस अधिकार का इस्तेमाल करेंगे। भाजपा को अनुच्छेद 370 पर चुप्पी ओढ़नी पड़ी। इस बाबत जम्मू कश्मीर के संविधान की दुहाई देते हुए यथास्थिति बरकरार रखने की बात सीएमपी में शुमार है। पश्चिमी पाकिस्तानी रिफ्यूजियों की नागरिकता का ठोस वादा एजेंडे में नहीं है।
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