जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने परिमोक्ष सेठ की जनहित याचिका पर कार्रवाई करते हुए निर्देश दिया है कि गोमांस की बिक्री पर प्रतिबंध लागू किया जाए।
राज्य भर में इसका विरोध हो रहा है। इसी मुद्दे पर बीबीसी संवाददाता विनीत खरे ने बात की याचिकाकर्ता परिमोक्ष सेठी से।
परिमोक्ष सेठ ने हाईकोर्ट की जम्मू बेंच में याचिका 2014 में दायर की थी। सेठ ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में गोवध और गोमांस बेचने पर 298 ए और 298 बी आरपीसी के तहत प्रतिबंध है।
ये बैन कब से है?
1932 से ये बैन है। मैंने यही जनहित याचिका फाइल की थी कि ये बैन पूरी तरह लागू नहीं किया जा रहा। इसे ठीक तरह से लागू किया जाए। इस क़ानून के तहत जम्मू-कश्मीर में गोवध के लिए दस साल की सजा है।
ये कहना कि गोवध पर प्रतिबंध नया है, ग़लत है। ये सब अफवाहें फैलाई जा रही हैं। कानूनी तौर पर जम्मू कश्मीर राज्य में 1932 से इस पर प्रतिबंध है। ये समझाइए कि किन परिस्थितियों में ये बैन लगा? इसका क्या कारण था?
जिस तरह आईपीसी है उसी तरह जम्मू-कश्मीर में आरपीसी है-रणबीर पैनल कोड। रणबीर पैनल कोड की धारा 298 ए, 298 बी, 298सी और 298 डी के तहत गोजातीय पशुओं के वध को बैन किया गया था। जम्मू क्षेत्र में तो इसे लगभग पूरी तरह लागू किया गया था, लेकिन कश्मीर के कुछ हिस्सों में बीफ मिलता था।
बन्नी, पटनीटॉप जगहों पर गोहत्या की घटनाएं हुई। इसको देखते हुए मैंने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। कोर्ट ने सिर्फ ये निर्देश दिया है कि इसको उचित तरीके से लागू किया जाए।
अब कुछ लोग इसे अपने निजी फायदे के लिए विवादास्पद बना रहे हैं। कुछ मीडिया हाउसेज अपना मसाला बेचने के लिए बैन-बैन बोल रहे हैं। ये बैन आज का नहीं है, 1932 से है।
कोर्ट के आदेश के बाद किस तरह की प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं?
देखिए, मुझे तो प्रतिक्रिया अच्छी ही मिल रही है। यहां तक कि मेरे कुछ मुस्लिम दोस्त हैं, उन्होंने कहा है कि ये बिल्कुल ठीक है। अब कुछ सियासी लोग या कुछ एंटी नेशनल लोग, जिनके पास कोई मुद्दा नहीं है, इसे मुद्दा बनाने के लिए उस पर स्ट्राइक कर रहे हैं।
अगर आपको आपत्ति थी तो आपको इसे कोर्ट में चैलेंज करना चाहिए था। जैसा कि आपने बताया कि आप भाजपा से जुड़े हैं, जो आपके आलोचक होंगे वो यही कहेंगे कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और लोकतंत्र में फ्रीडम ऑफ़ चॉएस होनी चाहिए। न कि जिस पर भी चाहो बैन लगा दो?
ये क़ानून 1932 में जम्मू-कश्मीर में बना था, भाजपा ने नहीं बनाया था। इससे भाजपा का कोई लेना-देना नहीं है। और जम्मू कश्मीर में तो हाल ही में भाजपा की गठबंधन सरकार बनी है।
पहले यहाँ कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार थी उस वक्त भी ये कानून था। इन लोगों को अगर इतनी दिक्कत थी तो इस क़ानून पर पहले कुछ क्यों नहीं कहा।