पहली बार विधायक बनकर विधानसभा में जाने का अनुभव कैसा रहा :
यह एक बड़ी जिम्मेदारी है जिसे नगरोटा के लोगों ने हमें दी है। इसका अहसास और इसके मायने हमें विधानसभा सत्र में हिस्सा लेने के बाद और गहराई से महसूस हुए।
आपका फोकस किन मुद्दों पर रहेगा :
मेरी प्राथमिकता इस वक्त बजट सत्र है क्योंकि जिन मुद्दों पर यहां बात होगी। फैसला होगा और उसका असर वित्तीय वर्ष 2026-27 में दिखेगा। अभी हमने जहां-जहां कमियां मिली हैं। हमने उन विभागों से जुड़े मुद्दों को उठाया है। शिक्षा, बिजली और आपदा प्रबंधन महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। इसी तरह जल शक्ति विभाग, वन्य जीव विभाग से जुड़े मुद्दों पर सदन का ध्यान आकृष्ट करने की कोशिश की है।
डिजिटली साक्षर बनाकर महिलाओं को बनाएंगे सशक्त
महिलाओं के हाथ में आर्थिक संसाधन जरूरी है। वे वित्तीय रूप से मजबूत होंगी तो उनके सामाजिक व राजनीतिक हालात भी सुधरेंगे। हमने युवाओं और महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्वरोजगार के लिए तैयार करना शुरू किया है। अब जरूरत उनके लिए बाजार तैयार करने की है तो हम उन्हें डिजिटली साक्षर बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं।
असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल न तो सदन में होना चाहिए और न ही बाहर
एक विधायक के तौर पर जरूर हम सदन में पहली बार गए हैं पर एक जागरूक नागरिक होने के नाते हमने लोकसभा और विधानसभा की कार्यवाही को देखकर समझने की कोशिश की है। जम्मू विधानसभा में जो कुछ असंसदीय या हंगामा हुआ वह कोई नई बात नहीं है। न ही यह अंतिम बार है। विरोध स्वस्थ लोकतंत्र के लिए स्वाभाविक प्रक्रिया है। असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल न तो सदन में होना चाहिए और न ही उसके बाहर होना चाहिए। सभी का अपना मान सम्मान है, उसको बनाए रखने के लिए हमें भाषा पर नियंत्रण रखना होगा। कई बार हड़बड़ाहट में कुछ गलतियां होना मानवीय स्वभाव है, पर बड़प्पन दिखाते हुए माफी मांग लेना चाहिए।
हंगामे को लेकर बोलीं
मेरा तो यही कहना है कि हंगामा होना ही नहीं चाहिए। यदि ऐसा हो जाता है तो हमें समस्या का जल्द से जल्द समाधान कर लेना चाहिए। खासकर यह बजट सत्र है, इसमें हमें आंकड़ों और तथ्यों पर बात करनी चाहिए। हमें विकास के लिए बात करनी चाहिए। जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता देनी चाहिए।